Students exam
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  • भाजपा शिक्षक आघाडी ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री को भेजा पत्र

नागपुर. वर्ष समाप्ति की ओर है लेकिन अब तक शालेय शिक्षा विभाग द्वारा 10वीं व 12वीं परीक्षा के बारे में घोषणा नहीं की गई है. परीक्षा पद्धति, मूल्यमापन, मौखिक परीक्षा की पद्धति जैसे तमाम मुद्दों को लेकर पालकों सहित छात्रों में संभ्रम की स्थिति बनी हुई है. इस संबंध में भाजपा शिक्षक आघाडी की राज्य संयोजक कल्पना पांडे, उल्हास फडके व पूर्व विदर्भ संयोजक अनिल शिवणकर की ओर से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड, शिक्षा राज्य मंत्री बच्चू कडू व अपर सचिव को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.

राज्य में 10वीं व 12वीं परीक्षा के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया जारी है. लेकिन अब तक परीक्षा की तिथि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है. सरकार ने कोविड काल की वजह से 25 फीसदी पाठ्यक्रम में कमी की है. इस हालत में परीक्षा का पैटर्न कैसा होगा? अंकों का निर्धारण कैसे किया जाएगा? किस चैप्टर से कितने प्रश्न पूछे जाएंगे? परीक्षा बहुपर्यायी प्रश्नावली पद्धति से होगा या नहीं? ऐसे छात्रों, पालकों के अलावा शिक्षकों के मन में भी ढेरों सवाल हैं.

छात्र तैयारी तो कर रहे हैं लेकिन अब तक दिशा तय नहीं होने से दिक्कतें भी आ रही हैं. हर वर्ष 10वीं और 12वीं में 15 लाख से अधिक छात्र परीक्षा में शामिल होते हैं. सभी छात्र 9वीं से ही नये पैटर्न के अनुसार पढ़ाई कर रहे हैं. राज्य के ग्रामीण भागों में स्कूल शुरू हो गए हैं लेकिन अब भी कई शहरों में स्कूल बंद हैं. कोविड की वजह से छात्रों की उपस्थिति भी कम है. जो छात्र अब तक ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित रह गये हैं उनकी पढ़ाई कैसे पूरी होगी. इस तरह के तमाम सवाल अब भी बरकरार हैं. शिक्षा विभाग द्वारा परीक्षा को लेकर अब तक किसी भी तरह का नियोजन नहीं किया गया है. 

कितना पाठ्यक्रम हुआ, मालूम नहीं

शिवणकर ने बताया कि मार्च से स्कूल बंद होने की वजह से छात्र घर में बैठे हैं. कहीं ऑनलाइन तो कहीं ऑफलाइन पढ़ाई चल रही है. अब तक सभी जगह पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हो सका है. साथ ही किन जिलों में कितना पाठ्यक्रम पूरा हुआ है, यह भी जानकारी शिक्षा विभाग के पास नहीं है. यही वजह है कि सरकार को परीक्षा के संबंध में जल्द से जल्द नियोजन कर तिथियों की घोषणा करना चाहिए. जिला संयोजक प्रदीप बिबटे, मेघश्याम जंजाल, कैलास कुरंजेकर, लिलेश्वर बोरकर, स्वरूप तारगे, अरुण रहांगडाले, गुरूदास कामडी, मनोहर बारस्कर, अरुण पारधी, रंजीव श्रीरामवार, सचिन कालबांडे, रजनीकांत बोंदरे, मोहन मोहिते आदि ने सरकार से ध्यान देने की मांग की है.