Dr. Mangesh Karad: In the future, education will be based on research and technology.

नागपुर. नवभारत Lockdown Vibes में आज शाम डॉ.  मंगेश कराड हमसे मुखातिब हुए। इस कार्यक्रम में उन्होंने हमारे साथ कोरोना संक्रमण के पश्चात बदलने वाले शिक्षा जगत पर अपने विचार रखे। आइये उनके विचारों को हम थोडा आत्मसात करें। 

Live: एमआयटी एडीटी विश्वविद्यालय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ मंगेश कराड

Live: एमआयटी एडीटी विश्वविद्यालय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ मंगेश कराड , ‘कोविड के पश्चात शिक्षा का भविष्य’ विषय पर चर्चा कर रहे हैं।

NavaBharat यांनी वर पोस्ट केले शनिवार, १६ मे, २०२०

डॉ.  मंगेश अपनी बात को रखते हुए कहा कि “यह सच है कि कोरोना संक्रमण में निश्चित रूप से शिक्षा जगत पर प्रभाव पड़ेगा। आज हमारे एजुकेशन सेक्टर पर  गुणवत्ता एवं मात्रा पर भी फर्क पड़ने वाला है। वहीं यह बात भी तय है कि शिक्षा का स्थानीयकरण भी होगा जिससे स्थानीय कॉलेज या यूनिवर्सिटी और छात्रों को निश्चित रूप से फायदा होगा। उनका यह भी कहना था कि आने वाला समय एजुकेशन 4. 0 पर आव्लाम्बित होगा।”

उन्होंने आगे समझाते हुए कहा कि जैसे एजुकेशन 1. 0 गुरुकुल पद्धति पर आधारित थी,एजुकेशन 2. 0-एक गुरु-बहु शिष्यों पर, एजुकेशन 3. 0 कंप्यूटर शिक्षण पर उसी प्रकार एजुकेशन  4. 0, विभिन्न कंप्यूटर और छात्रों कि सहभागिता पर आधारित होगा वह भी अर्फिसिअल इंटेलिजेंस (A.I) पर।  अब ऑनलाइन एजुकेशन कि सहभागिता हर आयु वर्ग के छात्रों के लिए विकसित कि जाएगी।अब शिक्षा और शिक्षण जगत दोनों को स्वयं में अनुकूलन की वृत्ति लानी होगी वरना आगे छात्रों को इसके चलते परेशान होना पड़ सकता है। उनका यह भी मानना था कि टेक्नोलॉजी का शिक्षण जगत पर अनुकूल प्रभाव पड़ने वाला है। अब समय आ गया है जब शिक्षक और छात्र दोनों ज्ञान संयोजन की धुरी बनेंगे। अब शिक्षकों को भी भविष्य के शिक्षण जगत के लिए  तकनिकी रूप से तैयार करना होगा।  

डॉ. कराड का यह भी मानना है है कि “कोरोना के चलते अब शिक्षा को लेकर लोगों कि मानसिकता बदलेगी और डिजिटल लर्निंग को अच्छा खासा बढ़ावा मिलेगा । हाँ अगर हम अगर छात्रों के एडमिशन के पैमाने को देखें तो इस पर अच्छा खासा फर्क पड़ेगा। वहीं हो सकता है हमें अब अपने शिक्षा केन्द्रों के शुल्क संरचना में भी बदलाव करने होंगे।” उनका यह भी कहना था कि अब भारतीय शिक्षा को बायोटेक और रिसर्च आदि क्षेत्रों  में ज्यादा काम करना होगा। वहीं वह ये भी मानते हैं  “अब देश कि शिक्षा व्यवस्थाओं पर कुछ बदलाव करने होंगे जैसे कि मेडिकल शिक्षा में। हमें मेडिकल शिक्षण कि लागत कम करनी होगी जिससे हमें कम समय और कम लागत  में अच्छे डॉक्टर्स हमे मिल सके। ताकि अगर कोरोना जैसी फिर कोई आपदा हो तो हमें कुशल चिकित्सकों कि कमी न हो।” 

इसी प्रकार उन्होंने यह भी कहा कि अब भारत की शिक्षा नीतियों पर भी बदलाव होगा। अब हमें ऐसे नीतियों का शिक्षा में समयोजन करना होगा जिससे कम खर्च में शिक्षा का व्यापक प्रसार हो। उनका यह भी मानना है कि अब वक़्त आ गया है कि विभिन्न यूनिवर्सिटी, कॉलेज और स्कूल को अपने खर्चों का भी संयोजन करने होंगे जैसे फीस,अध्यापकों का वेतन और मानव संसाधन नियमन का बेहतर परिष्कृत विस्तार करना होगा। 

अंत में प्रश्नों के उत्तर में उन्होंने कहा कि अब शिक्षण क्षेत्रों  में सामाजिक दुरी के नियमों का पालन भी करना होगा और शायद  अगले सेमेस्टर के पेपर ऑनलाइन तरीके से हों वहीं ऐसी व्यवस्था भी करनी होगी जिसमे 50 फीसदी छात्र कॉलेज में और 50 फीसदी छात्र घर से शिक्षा ग्रहण करें। यघपि उनका यह भी कहना था की कॉलेजों  को 2 पाली में चलाना थोडा दुष्कर होगा क्योंकि इसमें दूरी,सामाजिक नियम और सुरक्षा पर भी प्रश्नचिन्ह लगता है। 

कार्यक्रम कि समाप्ति पर उन्होंने कहा की आने वाले वर्षों में शिक्षा में अनुसंधान और नवाचार ही विशेष योगदान रखेगा। इस प्रकार डॉ. मंगेश कराड के साथ आज हुई चर्चा बेहद अहम् और ख़ास रही।