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    नागपुर. सदर के रेसीडेंसी रोड पर स्थित बिल्डिंग में बिल्डर से लेकर बैंक आदि जैसे सरकारी कार्यालय होने के बावजूद इनसे किराये की वसूली नहीं होने से संस्था की वित्तीय हालत कमजोर होने का हवाला देते हुए अंजुमन हामी-ए- इस्लाम ट्रस्ट की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के बाद न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश अनिल पानसरे ने सह धर्मदाय आयुक्त, गनी ट्रस्ट सहित 57 दूकानदारों को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह के भीतर जवाब दायर करने के आदेश दिए.

    याचिकाकर्ता की ओर से अधि. मोहन सुदामे ने पैरवी की. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अंजुमन ट्रस्ट की सदर रेसीडेंसी रोड पर जमीन थी. इस जमीन पर दूकान बनाकर किराये पर देने तथा किराये से होने वाली आय का इस्तेमाल अस्पताल आदि को मदद करने जैसे धर्मार्थ और शैक्षणिक मामलों में उपयोग करने की शर्त पर 99 वर्ष की लीज पर 5,000 वर्ग फुट जमीन आवंटित की थी. 

    रेंट में से केवल 30 प्रश हिस्सेदारी

    याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया गया कि वर्ष 1980 के दौरान याचिकाकर्ता के पास इतनी बड़ी जमीन पर निर्माण कार्य करने के लिए निधि नहीं थी. अत: समाज के हितों के लिए उसी समय गनी ट्रस्ट को 99 वर्ष की लीज पर जमीन दी गई. जमीन देते समय इससे प्राप्त होने वाली निधि का उपयोग धर्मार्थ और शैक्षणिक कार्यों पर ही करने तथा किराये से प्राप्त होने वाली निधि में से 30 प्रतिशत हिस्सा अंजुमन ट्रस्ट को देने की शर्त रखी गई थी. अधि. सुदामे ने कहा कि लंबे समय तक अंजुमन ट्रस्ट में चुनी हुई समिति नहीं थी जिससे वर्ष 2009 के बाद से ट्रस्ट को किराया मिलना बंद होने के बावजूद इस संदर्भ में कुछ नहीं किया गया. अंजुमन की ओर से भी कई तरह की शैक्षणिक आदि संस्थाएं संचालित की जाती हैं जिनमें 470 कर्मचारी कार्यरत हैं. ट्रस्ट की आय पर असर पड़ने के कारण आर्थिक बोझ पड़ने लगा है.

    प्रति वर्ष लगभग 2 करोड़ रु. किराया

    अधि. सुदामे ने कहा कि गनी ट्रस्ट के साथ हुए लीज के समझौते के अनुसार किराये में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी को देखते हुए प्रति वर्ष लगभग 2 करोड़ रुपए याचिकाकर्ता को किराये के रूप में प्राप्त होना था. पूरी इमारत में कई बड़ी-बड़ी कंपनियों की दूकानें हैं. यहां तक कि बड़े बिल्डर और बैंक भी इस इमारत में हैं. किंतु 13 वर्षों से किराया नहीं आ रहा है. गनी ट्रस्ट की ओर से किराया वसूलना तय था किंतु गनी ट्रस्ट में ही सक्षम सदस्य नहीं होने से हालत बिगड़ती गई.

    इससे वर्ष 2020 को गनी ट्रस्ट पर सक्षम सदस्यों की नियुक्ति के लिए सहधर्मदाय आयुक्त के पास अर्जी दायर की गई. इस अर्जी पर भी किसी तरह का निर्णय नहीं लिया गया. फलस्वरूप समस्या का हल नहीं हो पाया है. याचिकाकर्ता ने सभी 57 दूकानदारों को अदालत में किराये की राशि जमा करने के आदेश देने का अनुरोध किया. सुनवाई के बाद अदालत ने उक्त आदेश जारी किए.