Nylon Manja
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  • संक्रांति से पहले पूरे शहर में फैल जाएगा जाल

नागपुर. मकर संक्रांति को अब सिर्फ बीस दिन शेष रह गए हैं और पतंग उड़ाने वालों में उत्साह जुनून में बदल रहा है. इस पारंपरिक उत्सव के लिए कोई पाबंदी नहीं है लेकिन पतंग उड़ाने के लिए उपयोग किया जाने वाला सस्ता ओर जानलेवा चीनी नायलॉन मंजा अब भी सब तरफ नजर आ रहा है और इसके खतरनाक नतीजे भी सब तरफ दिखाई दे रहे हैं. परंतु देखने वाली बात यह है कि इस मंजे पर शासकीय प्रतिबंध लगे करीब पांच साल बीत चुके हैं इसके बावजूद यह पतंग उड़ाने वालों को आसानी से मिल रहा है और धड़ल्ले से बेचा जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि चीनी मंजे के नाम से बदनाम मंजा खतरनाक प्लास्टिक उत्पादों में से एक है. यह करीब दस साल पहले चलन में आया और हल्का, मजबूत व  सस्ता होने के कारण जल्द ही पूरे युवा वर्ग में छा गया. बीते आठ महीनों से बच्चों को पढ़ाई में ढील मिली हुई है इसलिए बरसात के बाद से बच्चे पतंग उड़ाने में बहुत सारा समय बिता रहे हैं. इससे शहर भर में पतंग, मंजे और इससे जुड़ी सामग्री जोरदार बिक्री बढ़ी हुई है. शहर के सभी तरफ खुले मैदान, खाली लेआउट और छतों पर चढ़कर बच्चे पतंगबाजी कर रहे हैं.  

नगर में जूनी शुक्रवारी, इतवारी, गोकुलपेठ आदि क्षेत्र में पतंग व मांजा की दूकानें स्टाइलिश पतंगों के साथ लगने लगी हैं. प्लास्टिक, जर्मन ताव, जिलेटिन

व कपड़े से तैयार विविध तरह की पतंगें उपलब्ध हैं. बाजार में चाइना के नायलॉन मंजे पर प्रतिबंध है. विक्रेताओं के अनुसार उनकी दूकानों में दूकानों में 9 तार वाला मंजा, बरेली का 9 तार वाला मंजा उपलब्ध है. खुले तौर पर दूकानों में देसी मंजा दिखाई दे रहा है लेकिन वास्तविकता यह है कि अब भी कई विक्रेता ग्राहकों की मांग पर नायलॉन मंजा उपलब्ध करा रहे हैं. पतंग उड़ाने वाले बच्चों के हाथों में यह देखा जा रहा है.

पक्षियों, मनुष्यों के लिए मौत का जाल

नायलॉन मंजा से हर साल बड़ी संख्या में पक्षी फंसकर घायल होते हैं और आखिर में मर जाते हैं. शहर के सभी इलाकों में नायलॉन मंजा जाल की तरह लिपटा हुआ नजर आ रहा है और यह कई सालों तक यहीं रहता है. पक्षियों के घुमावदार पंजे और नाखून इसमें फंस जाते हैं और पंख बुरी तरह फंस जाते हैं. खासकर यह रात के समय पेड़ों पर आकर बैठने वाले उल्लुओं के लिए ज्यादा जानलेवा साबित हो रहा है. इसके अलावा नायलॉन मंजे के साथ पतंगबाजी करने से हर साल कई लोग घायल होते हैं और कइयों की जानें जाती हैं. 

प्रशासन समय पर करे कार्रवाई

पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक नागरिकों ने अपील की है कि प्रशासन के संबंधित विभाग छुपाकर बेचे जा रहे नायलॉन मंजा के विक्रेताओं पर कार्रवाई करे. संक्रांति का पर्व पास आने के साथ ही साथ पतंग खरीदी का उत्साह जुनून में बदल रहा है. नायलॉन मंजा भी पूरे शहर में फैलता जा रहा है. यदि समय रहते इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो फिर यह जानलेवा साबित होगा.