Pavana Dam

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पिंपरी: पवना बांध (Pavana Dam) निर्माण के दौरान डूब क्षेत्र में आने वाले किसानों (Farmers) को चार एकड़ जमीन ( Land) देने का निर्णय लिया गया है। इन किसानों को कुल चार एकड़ जमीन दी जाएगी जिसमें दो एकड़ जमीन प्रभावित किसानों को और दो एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध होगी। बांध प्रभावित लोगों ने हालिया अपनी पुनर्वास की मांग को लेकर पिंपरी-चिंचवड़ (Pimpri-Chinchwad) की जलापूर्ति रोकने (Water Supply Stop) का आंदोलन किया था। तब उन्हें सरकार की ओर से आश्वस्त किया गया था। इसके अनुसार, जिलाधिकारी कार्यालय में हुई बैठक में उक्त फैसला किया गया। 

इस बैठक में सांसद श्रीरंग बारणे, विधायक सुनील शेलके, कलेक्टर राजेश देशमुख, उप कलेक्टर पुनर्वास गीतांजलि शिर्के, अपर कलेक्टर अजय मोरे, अधीक्षक अभियंता जगताप, पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका कमिश्नर शेखर सिंह, सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता विजय पाटिल, उप अभियंता अशोक शेटे, शाखा अभियंता अहिरे, अनुमंडल पदाधिकारी मावल बागड़े, तहसीलदार विक्रम देशमुख, पवना बांध प्रभावित संयुक्त संघ के पदाधिकारी और किसान उपस्थित थे।

 1972 में किया गया था बांध का निर्माण 

पवना बांध का निर्माण वर्ष 1972 में पुणे जिले के मावल तालुका में किया गया था। उसमें किसानों की जमीन जलमग्न क्षेत्र में आ गई थी, किसान कई वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, कई साल तक फैसला नहीं हुआ। जिलाधिकारी कार्यालय में पुणे जिले के पालक मंत्री चंद्रकांत पाटिल की उपस्थिति में पवना बांध प्रभावित किसानों के साथ विशेष बैठक आयोजित की गई। इसमें सर्वसम्मति से कुल चाक एकड़ भूमि जिसमें दो एकड़ प्रभावित कृषकों को और दो एकड़ शासकीय भूमि देने का निर्णय लिया गया। सांसद श्रीरंग बारणे और राज्य के पूर्व मंत्री बाला भेगड़े सभी किसानों को विश्वास में लेकर पवना बांध क्षेत्र को छोड़कर जो दो एकड़ जमीन दी जानी है उसका सर्वेक्षण करने की मांग की। इस मौके पर सभी प्रभावित किसानों ने पालक मंत्री चंद्रकांत पाटिल, सांसद श्रीरंग बारणे और पूर्व मंत्री बाला भेगड़े को धन्यवाद दिया और खुशी जाहिर की।