सड़क के अभाव में लोगों का बुरा हाल, जंगल में हुई प्रसूति

बदलापुर. अंबरनाथ (Ambernath) तथा मुरबाड तहसील (Murbad Tehsils) की सीमा पर बना बारवी बांध  (Barvi Dam) की ऊंचाई बढ़ने से बांध में पानी की क्षमता भी बढ़ गई है। इससे  ठाणे जिले के कई शहरों को अतिरिक्त पानी भी उपलब्ध होने लगा है। लेकिन पुनर्वास से वंचित कुछ गांव के नागरिक अभी भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।  

उक्त गांव के लोगों को बस्ती तक पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं है। गत सोमवार को गांव की एक महिला की प्रसूति जंगल में ही हो गई। सड़क न होने के कारण तलयाकी वाड़ी में रहने वाले अक्सर काफी परेशानी उठाते रहते हैं। महिला की प्रसूति जंगल में होने का मामला अब गरमाने लगा है। इस गांव तक सड़क व गांववासियों को पीने का पानी उपलब्ध कराने एक जनहित याचिका भी मुंबई हाई कोर्ट में दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई में उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन को तत्काल पेयजल और उस गांव में सड़क उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जिला प्रशासन ने तलयाकी वाडी  में यह दोनों सुविधा देने के लिए कोटेशन मंगवाया है।

बताया गया है कि कुएं पर सोलर पंप के माध्यम से पानी योजना के कार्यान्वयन के लिए 23 लाख 34 हजार रुपए और सड़क के लिए 68 लाख 16 हजार रुपए की आवश्यकता है। जानकारी के अनुसार मुरबाड से 8 किमी की दूरी पर स्थित आदिवासी बस्ती तलायाकी वाड़ी में 45 से 50 परिवार रहते हैं। मुरबाड शहर से तलयाकी वाडी के रास्ते में 5 किलोमीटर तक सड़क है। अगले 3 किलोमीटर  पैदल चलना पड़ता है।

उबड़-खाबड़ रास्ता होने के कारण मुख्य सड़क से कोई भी वाहन गांव में प्रवेश नहीं कर सकता है. परिणामस्वरूप, स्कूली बच्चों, बीमारों और बुजुर्गों को बहुत दिक्कत होती है।  यदि कोई व्यक्ति गंभीर बीमार में है, तो उसे दो बांस में  चादर बांधकर  मुरबाड लाया जाता है, जो काफी कष्टदायी होता है। 14 दिसंबर की मध्यरात्रि में गांव की एक महिला पुष्पा रमेश शिंगवे को प्रसव पीड़ा शुरू हुई और ग्रामीण उसको मुरबाड़ ले जाने के लिए निकले।  सड़क न होने के कारण  उसने रास्ते के जंगल में बच्चे को जन्म दिया। बाद में उस  महिला को मुरबाड के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जच्चा और बच्चा दोनों अब सुरक्षित है। तलयाकी वाडी के निवासियों के पुनर्वास का मुद्दा अदालत में प्रलंबित है।