साढ़े तीन वर्षों में 8.07 लाख नमूने जांचे, मलेरिया के मात्र 5 पाजिटिव मिले, उपाय योजना साबित हो रही है कारगर

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वर्धा. मलेरिया यह मानव निर्मित बीमारी कही जाती है़  वर्ष 2004 से विश्व मलेरिया प्रतिरोध के नाम से बदलकर उसके स्थान पर वैश्विक कीटजन्य बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम किया गया है़  कृमि कीट से प्रसारित होने वाली बीमारी के नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलायी जाने वाली उपाय योजना जिले में कारगर साबित होती जा रही है़ पिछले साढ़े तीन वर्षों में करिब 8 लाख 07 हजार 390 लोगों के रक्त नमूनों की जांच की गई़ इसमें केवल 5 लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव पायी गई. इस बार विश्व मलेरिया दिन पर ‘शून्य मलेरिया वितरित करने का समय: निवेश करें, नया करें, अमल करें’ इस घोषवाक्य के साथ स्वास्थ्य विभाग जिले में जरूरी उपाय योजना करने पर जोर दे रहा है़ 25 अप्रैल विश्व मलेरिया दिवस पर रंगोली स्पर्धा, एकांकीका, निबंध स्पर्धा, प्रतिज्ञा पत्र का पठन आदि जनजागरण पर उपक्रम चलाये जाएंगे.

मलेरिया के लक्षण व दुष्परिणाम इस प्रकार

मलेरिया होने पर ठंड लगने के साथ ही तेज बुखार आता है़  इससे प्रभावित मनुष्य को अतिसूक्ष्म ऐसे मलेरिया परोपजीवी कृमि से होती है़  कृमि का फैलाव यह मच्छर के जरिए होता है़  परंतु सभी प्रकार के मच्छर यह मलेरिया का प्रसार नहीं कर सकते़  देश में केवल नौ प्रकार के एनाफेलीस मच्छर हैं जो मलेरिया का प्रसार करते है़ं  इसमे एनाफेलीस मच्छरों की मादी प्रमुखता से मलेरिया के फैलाव के लिए जिम्मेदार है़  मलेरिया के मरीजों को पहले जोर की ठंड लगती है़  इससे शरीर कांपने लगता है़  सिरदर्द बढ़ता है़  सभी आयुगुट के नागरिकों को यह बीमारी होती है़  अनेक घरों में स्वास्थ्य वायुविजन व अयोग्य प्रकाश योजना के कारण मच्छरों की पैदास बढ़ती है़  अनेक लोग काम से एक जगह से दूसरे जगह जाते हैं, इससे इसका प्रसार बढ़ता है़  मलेरिया से लीवर व प्लीहा पर सूजन आती है़  परोपजीवी कृमि से रेड ब्लड सेल पर आघात होकर एनेमिया होने की आशंका रहती है़  इससे मनुष्य की कार्यक्षमता पर परिणाम होता है़  गर्भवती व बालकों को मलेरिया से अधिक धोखा रहता है़  कमजोरी व वजन घटता है़  गर्भवती को इससे प्रभावित होने पर उसका गर्भपात भी होने का डर है. 

इन उपाय योजना पर गंभीरता से दें ध्यान

मच्छरों पर नियंत्रण पाने के लिए परिसर साफ रखे़ं  अधिक समय तक पानी संचय न होने दे़ं  सभी बर्तन साफ धोकर सूखाए़  जैविक उपाय योजना के अंतर्गत गप्पी मछलियां छोड़ी जाती है़  इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष मुहिम चलायी जाती है़  प्रत्येक सेप्टिक टैंक पर वेंटपाइप को कैप अथवा जाली लगाए़  कंटेनर सर्वेक्षण, टेमीफाँस, मच्छरों की पैदास स्थल नष्ट करने पर जोर दिया जाता है़  मुहिम को सफल बनाने नागरिकों से सहयोग करने की अपील जिलाधिकारी राहुल कर्डिले, जिप के मुकाअ रोहन घुगे, डीएचओ डा़ रा.ज पराडकर, सीएस डा़ सचिन तड़स व जिला मलेरिया अधिकारी जयश्री थोटे ने किया है.