बोर बांध: नहरें गिन रही आंखरी सांसें

  • पेंच प्रकल्प के पैटर्न पर आधुनिकीकरण की जरूरत, 50 वर्ष पहले किया गया निर्माण

वर्धा. जिले के बड़े प्रकल्प में से एक बोर प्रकल्प की नहरें इन दिनों आंखरी सांसें गिन रही हैं. विविध समस्याओं के चलते नहरों से छोड़ा जा रहा पानी कहीं वरदान तो कहीं शापित साबित हो रहा है. परिणामवश सरकार ने पेंच प्रकल्प के पैटर्न पर बोर बांध की नहरों का आधुनिकीकरण करना आवश्यक हो गया है. इसके लिये सरकार स्तर प्रयास होना आवश्यक है. जिले के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो इसके लिए सरकार ने बोर नदी पर सेलू तहसील में बांध का निर्माण किया है. सन 1957 में बांध का निर्माण कार्य आरंभ किया गया था. आठ वर्ष के भीतर सन 1965 में बांध का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ. 

प्रकल्प की जलसंग्रह क्षमता 138.75 दलाघमी 

छोटी तथा बड़ी नहरों का काम 1965 से 1970 तक पूर्ण हुआ. उक्त कार्य पर 388 लाख रुपये खर्च हुये थे. प्रकल्प की जल क्षमता 138.75 दलाघमी है. बांध व नहरों का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद सेलू व हिंगनघाट तहसील के अनेक गांवों के किसानों को सिंचाई के लिये पानी मिला. परिणामवश यह प्रकल्प सेलू तहसील के लिये वरदान साबित हुआ.

प्रकल्प की 16,194 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता

बोर प्रकल्प की कुल सिंचाई क्षमता 16 हजार 194 हेक्टेयर है. परंतु नहरों के कारण वर्तमान में सिंचाई क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ा है. गत पांच वर्षों का अवलोकन करे तो केवल 50 से 60 प्रश तक ही सिंचाई कार्य पूरा हुआ है. 2020-21 में 11 हजार 38 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हुई थी, परंतु उसके पहले के 4 वर्ष का अवलोकन करे तो औसतन 50 प्रश तक ही क्षेत्र में सिंचाई हुई है.

कर्मियों की कमी का भी दिखाई दे रहा असर

सिंचाई विभाग के सेलू उपविभाग में केवल 10 से 15 प्रश कर्मचारी वर्तमान में कार्यरत होने के कारण उसका बुरा असर सिंचाई व अन्य कामों पर हो रहा है. अधिकारी व कर्मचारियों का कहना है कि मानव संसाधन की कमी होने के कारण सभी और ध्यान देना असंभव है. सिंचाई के लिये पानी छोड़ते समय भी अनेक बार कम के कारण दिक्कतें आती है.

डैम के नहरों की हालत हो गई है खस्ताहाल

बांध की नहरें 50 वर्ष पुरानी होने के कारण आज अनेक जगह क्षतिग्रस्त हो गई है. साथ ही समय समय पर उसका रखरखाव नहीं होने के कारण नहरों में घांस फूस के साथ ही पेड़ उग आए हैं. इससे कैनल से पानी गुजरते समय अनेक बाधाएं निर्माण होने के कारण कैनल का पानी खेतों में घुस जाता है. तो अनेक जगह पर कैनल से पानी का रिसाव होने के कारण किसानों को खेती करना कठीन हो गया है. खेतों तक जाने वाली छोटी नहरें अनेक जगह बुझ जाने कारण प्रति वर्ष शिकायतें बढ़ती जा रही है. नहरों की खस्ताहालत के चलते सिंचाई टारगेट विभाग पूर्ण नहीं कर पा रहा है.

समृद्धि महामार्ग के कारण कैनल को पहुंची क्षति

समृद्धि महामार्ग के निर्माण कार्य के दौरान बोर बांध की नहरों का भारी नुकसान हुआ है. अनेक जगह नहरें बुझाई गई है. तो कुछ उसे तोड़ा गया है. नहरों के भीतर पीलर तथा अन्य सीमेंटीकरण का कार्य होने के कारण कैनल का मार्ग अवरूद्ध हुआ है, जिससे सिंचाई पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. वर्तमान में अंतिम छोर पर पानी नहीं पहुंचने की शिकायतें बढ़ गई है. विदर्भ सिंचाई निगम के पास पर्याप्त निधि नहीं होने के कारण यह काम उचित समय पर होना असंभव है. परिणामवश आने वाले समय में यह समस्या और विकराल हो सकती है. सरकार ने नागपुर जिले का पेंच प्रकल्प पुराना होने के कारण उसका आधुनिकीकरण किया है. उसी पैटर्न पर बोर बांध के कैनल, आउटलेट गेट, मायनर कैनल गेट का आधुनिकीकरण होना आवश्यक है. नहीं तो बोर बांध से भविष्य में सिंचाई के लिये पानी मिलना कठीन हो जायेगा.

शिकायतों की ओर की जा रही अनदेखी

नहरों के संदर्भ में सिंचाई विभाग के पास निरंतर शिकायतें की गई है. किंतु शिकायतों की ओर कोई ध्यान नहीं देता. कैनल की साफसफाई प्रति वर्ष होना आवश्यक है. यह कार्य पानी छोड़ने के पूर्व होना चाहिए, परंतु होता नहीं है. नहर व गेट की हालत खराब है. अधिकारी ध्यान नहीं देते है, जिससे पानी वापर संस्था नाम के लिए रह गई है. परिणामवश संस्था के सभी पदाधिकारियों ने त्यागपत्र सौंप दिया.

-प्रशांत गोमासे, अध्यक्ष-संत केजाजी पानी वापर संस्था, घोराड.   

खेतों तक पानी समय पर नहीं पहुंचता

नहर की साफसफाई नहीं होने के कारण खेतों तक पानी पहुंचने में काफी विलंब होता है. इससे फसल पर बुरा प्रभाव पड़ता है. पानी छोड़ने के पूर्व कैनल की साफसफाई करने की जानकारी सिंचाई विभाग ने दी थी. परंतु मेन कैनल की सफाई अभी तक नहीं हुई है.

-अरूण लोणकर, सचिव-सिद्धि विनायक पानी वापर संस्था, केलझर.