What kind of politics was this on the woman mayor of Ranchi, she was non-existent and did not get the support of her loved ones

    ओमप्रकाश मिश्र 

    रांची. झारखंड (Jharkhand) पृथक होने के बाद से ही कमजोर राजनैतिक रहनुमाओं का शिकार, झारखंड की राजनीतिक अस्थिरता (Political Instability) का परवान चढ़ती रही है। जिसका सीधा खामियाजा यहां की निरीह जनता को भोगना पड़ रहा है। अपने विधायिका की लगातार लंबी पारी खेलने वाले झारखंड के एक विधायक ने दबी जुबान इस बात को स्वीकार किया कि यहां राजनीति का विकेन्द्रीकरण नहीं बल्कि राजनीति में लुट का तांडव मचा हुआ है। राजनीति की गलियारे से अपनी कर्तव्य निष्ठा का पाठ भूलकर लूट की नित नई आयाम को साकार करने में जुटे है झारखंड  के नेता। 

    झारखंड की राजनीति में लूट खसोट और सस्ती लोकप्रियता अर्जित करने के कश्मकस और भाग दौड़ के बीच झारखंड की राजनीति में एक अलग चेहरा उभर कर आया है, जो रांची की दशा दिशा, कम से कम रांची की स्वच्छता साफ सफाई और गन्दगी से बजबजाती दुर्गन्ध और महामारी की चपेट में आती यहां की जनता को बीमारी से उभारने की अपनी तमाम कोशिशें  झोंक देने पर भी सभी तरफ से घोर उपेक्षा की शिकार है, और वो है, रांची की वर्तमान महापौर आशा लकड़ा। झारखंड की राजनीति में आशा लकड़ा की मौजूदा हालात अपने अस्तित्व को महफूज रखने जैसी हो गई है। और ये नौबत इसलिए आई है क्योंकि आशा लकड़ा, सतारूढ़ हेमंत सरकार को समर्थन देने वाली कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की दल पिछले राजनीति का शिकार तो हो ही गई है।  इन्हें अपनी ही पार्टी भारतीय जनता पार्टी की उपेक्षा का दंश झेलना पड़ रहा है।

    आशा लकड़ा की मौजूदा हालात “गौर तो गैर थे अपनों का सहारा न मिला” जैसी हो कर रह गई है। आशा लकड़ा को महापौर के कर्तव्य और अधिकार के साथ साथ उनके कार्य करने की इच्छा शक्ति को अस्थिर करने वाले नगर आयुक्त मुकेश कुमार को मिल रहे सतारूढ़ पार्टी के समर्थन से उबरने या लड़ने के लिए दिल्ली के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पूरी का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

    लोकतंत्र पर राजतंत्र कितना भारी है

    वर्तमान परिपेक्ष में कूड़े कचडों के जमाव से नारकीय स्थिति झेल रहे नगरवासियों को इससे मुक्ति दिलाने के लिये महापौर द्वारा कल चौथी बार नगरपालिका भवन में बुलाई गई समीक्षा बैठक में शामिल नहीं होकर नगर आयुक्त मुकेश कुमार ने इस बात को सत्यापित कर दिया है कि लोकतंत्र पर राजतंत्र कितना भारी है। ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि मुकेश कुमार को मौजूदा हेमंत सरकार का वर्जित प्राप्त है और आशा लकड़ा इसी राजनीति का शिकार हो रही है।

    सतारूढ़ पार्टी का पूरा समर्थन मिल रहा है

    आशा लकड़ा दूसरी राजनितिक पार्टी की उपेक्षा का दंश तो झेल ही रही है, इन्हें अपनी पार्टी के नेताओं का भी समर्थन नहीं मिल रहा है। ऐसी स्थिति में “गैर तो गैर थे अपनों का सहारा न मिला” वाली  बात कल तब सामने आई जब भारतीय जनता पार्टी द्वारा आहूत एक कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा के विधायक सीपी सिंह, विधायक नविन जायसवाल, सांसद समीर उरांव, सांसद संजय शेठ और पार्टी के आला पधादिकारियों के बीच महापौर की उपस्थिति में नवभारत के राज्य ब्यूरो प्रमुख द्वारा यह सवाल उठाया गया कि आशा लकड़ा भाजपा की ओर से रांची की एक महिला महापौर है।

    नगर आयुक्त अपने आन के वर्चस्व की लड़ाई आशा लकड़ा से लड़ रहे है। नगर आयुक्त को तो सतारूढ़ पार्टी का पूरा समर्थन मिल रहा है। आपलोग इनके समर्थन में आवाज क्यों नहीं उठाते ? इस सवाल पर निरुत्तर हो गए विधायक और सांसद एक दूसरे पर जिम्मेदारी का ठीकरा फोड़ते हुए अपनी कुर्सी छोड़ चले गए। हालांकि बाद में विधायक सीपी सिंह ने अपनी गोलमटोल राजनीति बातों से खुद को इस सवाल के चक्रव्यूह से बाहर निकलने की कोशिश किया पर सटीक उत्तर नहीं दे सके।  

    सफाई का कम सुचारू रूप से जारी रहे

    फ़िलहाल राजधानी रांची का आलम यह है कि दो पक्षीय राजनीति का दंश झेल रही महापौर चाहती है की रांची में साफ सफाई का कम सुचारू रूप से जारी रहे। नगर आयुक्त और उनके कर्मचारीगण बहाने की आड़ में महापौर के हर प्रयास को विफल करने में आमादा हैं। महापौर अखबारों और मिडिया के माध्यम से नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को रह रह कर उजागर कर रही है उन्होंने नगर निगम के कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे दो निजी एजेंसी का हवाला देते हुआ कहा कि साफ सफाई करने और डस्टबीन लगाने के लिए सरकार दोनों एजेंसियों को मोटी रकम दी है पर कहीं एक भी जगह न तो डस्टबीन नजर आती है न ही साफ सफाई।

    अधिनियम 2011 का उलंघन कर रहे हैं

    महापौर ने नगर आयुक्त पर मुकेश कुमार पर राज्य सरकार के इशारे पर चलने का आरोप लगाते हुए कहा कि नगर आयुक्त के व्यवहार से इनकी विश्वसनीयता संदिग्ध प्रतीत होने लगी है उनके वक्तव्य और कार्य प्रणाली में राज्य सरकार की राजनीति स्पष्ट झलकने लगी है नगर आयुक्त बार बार नगरपालिका के अधिनियम 2011 का उलंघन कर रहे हैं। महापौर ने नगर आयुक्त पर अह भी आरोप लगाया है कि नगर आयुक्त जानबूझकर निजी एजेंसियों को लाभ पहुंचाने और इन एजेंसियों की आड़ पर भ्रष्टाचार का पोषण करने की योजना पर काम कर रहे है।

    भविष्य के गर्भ में छिपा है

    झारखंड की ऐसी राजनीति से जहां महापौर हासिये में चली गई है वहीं रांची की निरीह जनता सरकार को दिए जाने वाले सारे कर चुकाने के बाद भी सुविधाओं से महरूम है। ऐसी स्थिति में आने वाले कल में झारखंड की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा और उससे यहां की जनता का उत्थान होगा या पतन ये भविष्य के गर्भ में छिपा है।