Soybean and Cotton

  • किसान नेता विजय जावंधिया का सवाल
  • पीएम मोदी को भेजा पत्र, कहा गुमराह कर रही सरकार

वर्धा. कपास व सोयाबीन के दामों में आयी तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार में आयी तेजी के कारण है. परंतु भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा यह प्रचार करना कि, कपास- सोयाबीन के दाम में तेजी इन तीन कानून के कारण है तो यह देश को गुमराह करने जैसा है. इस संबंध में किसान नेता विजय जावंधिया ने पीएम मोदी को पत्र भेजा है.

उन्होने अपने पत्र में कहा है कि, केन्द्र सरकार का दावा है कि, बनाए गए तीनों कृषि बिल 70 साल से कांग्रेस के राज में जो शोषण होता था, उससे मुक्ति दिलायेंगे. किसानों को कृषि उपज मंडी के बाहर माल बेचने की सुविधा से अच्छे दाम मिलेंगे, उनकी आमदनी दुगनी होगी. पीएम मोदी ने बनारस के भाषण में कहा था कि, हमने 3 लाख करोड का गेहूं खरीदी किया. 6 लाख करोड रुपए का धान खरीदी किया तथा 60 हजार करोड रुपए की दाले खरीदी की. इस का मतलब है कि बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य से दाम कम थे, इस लिए सरकार को खरीदना पडा. इस वर्ष प्रारंभ से ही सोयाबीन के दाम बाजार में समर्थन मूल्य से जादा थे. इस हफ्ते कपास के दाम में भी तेजी आयी है. कपास के दाम समर्थन मूल्य के आसपास 5500 से 5700 रुपए प्रति क्विंटल के है. इस वर्ष जब कपास की खरीदी प्रारंभ हुई थी तब 5000-5200 ही दाम बाजार में थे. जब कि कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5600 से 5825 रुपए का है.

केन्द्रीय कपास निगम को कपास खरीदी प्रारंभ करनी पडी. पंजाब में केन्द्रीय कपास निगम ने करीब 28 लाख क्विंटल की कपास की खरीदी की है, जब कि व्यापारियों ने सिर्फ 5.5 लाख क्विंटल खरीदी की है. इस हफ्ते जो तेजी बाजार में कपास के दामों में तेजी आयर है, क्या इस का कारण आपके सरकार के तीन कानून है? इस वर्श सोयाबीन के दामों में जो तेजी है क्या इन तीन कानून के कारण यह तेजी है? हमारी जानकारी यह है कि, अमेरिका के बाजार में दो महिने पहले जो कपास के दाम थे, उस में तेजी आयी है, इसी कारण 75 सेंट प्रति पाऊंड रुई का भाव 86 सेंट प्रति पाऊंड हो गया है.

हमारे रुपए का भी अवमुल्यन हुआ है. देश में कपास की फसल भी बहुत कमजोर है. अमेरिका में सोयाबीन के दाम में भी तेजी आयी है. 7-8 डॉलर प्रति बुशेत सोयाबीन के दाम 12-13 डा़लर प्रति बुशेल के हो गए है. इस कारण से भारत में भी दाम बढे है. लेकिन इसे कृषि कानून से जोडना मतलब गुमराह करने जैसा है. जिससे इस संबंध में खुलासा करें, ऐसी मांग किसान नेता विजय जावंधिया ने पीएम मोदी को पत्र भेजकर की है.