कचरा संग्रहण का कार्य फीसड्डी, कबाड़ वाहनों के भरोसे शहर के कचरा संग्रहण की प्रक्रिया

    यवतमाल. शहर में कचरा प्रबंधन के नए ठेके पर काम शुरू हो गया है. नगर पालिका की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए कई कचरा संग्रहण के वाहन खराब हैं. शहर में कचरा संग्रहण इन दोषपूर्ण वाहनों पर निर्भर हो गया है. बावजूद नगर पालिका प्रशासन गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहा है.

    शहर में कचरा प्रबंधन के लिए 10 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है. नए ठेकेदार ने शहर में कचरा संग्रहण का काम भी शुरू कर दिया है. नगर पालिका ने अभी तक ठेकेदार को आवश्यक संख्या में वाहन उपलब्ध नहीं कराए हैं. अधिकांश वाहन धक्के पर है. शहर में इन कबाड़ी वाहनों के आधार पर पिछले महीने से कचरा संग्रहण का कार्य चल रहा है. अमृत ​​शहर योजना में शामिल शहर के कचरा प्रबंधन के लिए स्वतंत्र डीपीआर तैयार किया गया था. 

    ठेकेदार को 10 करोड़ में सफाई का ठेका

    12 करोड़ 92 लाख रुपये की डीपीआर के अनुसार नगर पालिका ने शहर में ठोस कचरा संग्रहण के लिए करीब 2 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से 62 चौपहिया एपे वाहन खरीदे. उसके 6 महीने अंतराल के बाद तिपहिया 23 ऐपे वाहन की फिर से खरीदारी की गई. अलग से 80 लाख रुपये खर्च किए गए. इन वाहनों में से 62 चौपहिया वाहनों को पालिका की ओर से कचरा संग्रहण ठेकेदार को सौंपा गया था. तत्कालीन ठेकेदार ने उनका ठेका समाप्त होने के बाद वाहनों को नगर पालिका दयनीय स्थिति में लौटा दिया. ठेकेदार की ओर से उपलब्ध कराए गए वाहन नए ठेकेदार को दे दिए गए. इसमें 42 चौपहिया और 12 तिपहिया वाहन उपलब्ध कराए गए. 42 चौपहिया वाहनों में से कई खराब है. शहर को स्वच्छ रखने के लिए 10 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है. ठेकेदार को वाहन अच्छी स्थिति में उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं, कचरा संग्रहण पर असर पड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.

    टायर फट गए, सामग्री गायब

    नगर पालिका के इनमें से कई वाहनों के टायर जा चुके हैं. 13 वाहनों की बैटरियां बंद हैं. इन वाहनों को धक्का देकर शुरू करना होता है. अधिकांश वाहनों में साउंड सिस्टम बंद है, जबकि कुछ वाहनों में यह गायब हो गयी है. तिपहिया वाहन भी कई दिनों से खड़े हैं, जिससे कुछ उपकरण नदारद हैं.

    नपा पर दुरुस्ती का जिम्मा

    नगर पालिका के वाहनों को सौंपने वाले पहले ठेकेदार को उन्हें अच्छी स्थिति में वापस करने की आवश्यकता थी. नगर पालिका प्रशासन को भी ठेकेदार द्वारा वाहनों की मरम्मत करने की आवश्यकता थी. प्रशासन ने इसे अनदेखा कर दिया. उसके बाद भी हमने सभागृह में वाहनों की मरम्मत का निर्णय लिया. स्वास्थ्य विभाग ने ठेकेदार की जमा राशि से मरम्मत करने की मंजूरी दी. 2 महीने बाद भी अगर वाहन खराब होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी नगर प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की होती है.

     कांचनताई चौधरी, नगराध्यक्ष,यवतमाल.

    वाहनों की दुरुस्ती का कार्य शुरू 

    नगर पालिका के स्वास्थ्य विभाग के पास जमा कुछ वाहन खराब थे. इसकी मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है. कुछ वाहनों को चालू कर दिया गया है और शेष वाहनों की मरम्मत की योजना बनाई जा रही है.

    -शिवाजी वठारे, स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका.