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    कोहिमा. नगालैंड (Nagaland) के मोन जिले (Mon District) में शनिवार को एक पिकअप ट्रक पर गोलीबारी करने से पहले सेना ने उसमें सवार लोगों की पहचान करने की कोई कोशिश नहीं की थी। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DJP) टी जॉन लोंगकुमेर और आयुक्त रोविलातुओ मोर की संयुक्त रिपोर्ट में यह बात कही गई है। दोनों शीर्ष अधिकारियों ने चश्मदीदों के हवाले से कहा कि ग्रामीणों ने पाया कि सेना के विशेष बल छह लोगों के शव अपने आधार शिविर में ले जाने के इरादे से लपेटकर, एक पिकअप वैन में डालकर ‘‘छिपाने” की कोशिश कर रहे थे। 

    राज्य सरकार को रविवार को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ चार दिसंबर को शाम चार बजकर 10 मिनट के आसपास, आठ ग्रामीण तिरु स्थित कोयले की एक खान से पिकअप ट्रक में घर लौट रहे थे, उन पर आचनक ही सुरक्षा बलों (कथित तौर पर, असम में स्थित 21 वीं पैरा स्पेशल फोर्स) ने घात लगाकर हमला किया और उनकी हत्या की। वस्तुत: उनकी पहचान करने की कोई कोशिश नहीं की गई थी।” अधिकारियों ने बताया कि सभी ग्रामीण निहत्थे थे और कोयले की खान में काम करते थे। उनमें से छह की मौत मौके पर ही हो गई थी और दो गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

    अधिकारियों ने रिपोर्ट में बताया कि गोलियां की आवाज सुन कर ग्रामीण मौक पर पहुंचे। ‘‘घटनास्थाल पर पहुंचने पर, उन्होंने एक पिकअप ट्रक देखा और विशेष बल के कर्मी छह शवों को लपेटकर उन्हें ट्रक (टाटा मोबाइल) में चढ़ा रहे थे, वे जाहिरा तौर पर शवों को उनके आधार शिविर ले जाने के इरादे से ऐसा कर रहे थे।”

    रिपोर्ट में कहा गया कि शवों को तिरपाल में लिपटा देख गांववालों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हो गई। गुस्साए लोगों ने सुरक्षा बलों के तीन वाहनों में आग लगा दी।उन्होंने कहा, ‘‘ हंगामे में, सुरक्षा बलों ने फिर गांववालों पर गोलियां चलाईं, जिससे सात और ग्रामीण मारे गए। चश्मदीदों ने पुष्टि की है कि विशेष बलों के जवानों ने घटनास्थल से असम की ओर भागते हुए अंधाधुंध गोलियां चलाईं और यहां तक कि रास्ते में कोयला खदान की झोपड़ियों पर भी उन्होंने गोलीबारी की।”

    केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को संसद में इस घटना को ‘‘गलत पहचान का मामला” बताया था। उन्होंने कहा था, ‘‘ भारत सरकार नगालैंड की घटना पर अत्यंत खेद प्रकट करती है और मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है।नगालैंड में शनिवार को हुई गोलीबारी में 14 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। गौरतलब है कि सेना के जवानों ने शनिवार शाम को एक पिकअप वैन में घर लौट रहे कोयला खदान कर्मियों को कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन एनएससीएन (के) के युंग आंग गुट से संबंधित उग्रवादी समझ लिया था और गोलियां चला दी थी।