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नयी दिल्ली. मोदी सरकार (Narendra Modi) द्वारा लेरे गए विवादस्पद कृषि कानूनों (Farm Laws) के चलते अब देश के किसान आज 32 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर घमासान (Farmers Protest) कर रहा है। जहाँ किसान हर हाल में नए कृषि कानूनों को पूरी तरह खत्म करवाना चाहते हैं। वहीं मोदी सरकार कानून में केवल संशोधन के लिए ही तैयार है। इस गतिरोध के मध्य अब  कम से कम किसान, मोदी सरकार से बातचीत के लिए तैयार हो गए हैं। जिसके तहत अब 29 दिसंबर को मोदी सरकार (Narendra Modi) और किसान संघठनो (Farmers Associations) के बीच बातचीत होगी।

क्या हुआ था कल:

गौरतलब है कि बीते शनिवार को सिंघु बॉर्डर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पूर्व आप नेता और स्वराज इंडिया (Swaraj India) प्रमुख योगेंद्र यादव (Yogendra Yadav) ने इस बात की घोषणा की थी कि, किसान फिर सरकार से बातचीत करने को राजी हो गए हैं। जिसके तहत मंगलवार 29 दिसंबर 2020 को सुबह 11 बजे बैठक होगी।। यादव ने कहा था कि, “हम संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से सभी संगठनों से बातचीत कर ये प्रस्ताव रख रहे हैं कि किसानों के प्रतिनिधियों और भारत सरकार के बीच अगली बैठक 29 दिसंबर 2020 को सुबह 11 बजे आयोजित की जाए।”

क्या हैं किसानों की सोच:

लेकिन यह भी बता दें कि किसानों ने बातचीत के लिए हामी तो भरी है, परन्तु अब उन्होंने अपनी तरफ से एक लकीर भी खींच दी है। इस लकीर के आगे अब किसान नहीं जाएंगे। इसलिए किसान सरकार से 29 दिसंबर को बातचीत तो करेंगे, लेकिन केंद्र पर दबाव बनाने के लिए भी उन्होंने पूरे एक हफ्ते का विरोध प्रदर्शन का पूरा खाका तैयार रखा है। 

किसानों का 27 दिसंबर से 1 जनवरी तक के कार्यबिंदु  इस तरह से हैं: 

  • अगर सरकार के साथ किसानों की बातचीत नाकाम हो जाती है तो किसान नए साल में अपने आंदोलन को अगले चरण में ले जाएंगे। 
  • किसान नेता डॉ दर्शनपाल के अनुसार किसान आज और कल यानी कि 27 और 28 दिसंबर को गुरु गोविंद सिंह के बेटे का शहीदी दिवस मनाएंगे। 
  • फिर 29 दिसंबर को किसानों की  11 बजे मोदी सरकार से बात कहोगी। आंदोलन के लिहाज से ये दिन अहम होगा, अगर दोनों पक्षों के बीच बातचीत सहीं दिशा में आगे बढ़ती है तो किसान थोड़ी नरमी दिखा सकते हैं, वरन 30 तारीख को किसान ट्रैक्टर से सिंघु से लेकर टिकरी और शाहजहांपुर तक अपना मार्च करेंगे।
  • किसानों का का यह भी कहना है कि 31 और 1 तारीख को वे लोगों को सिंघु बॉर्डर पर बुला रहे हैं। वे चाहते हैं कि लोग लंगर खाने और किसानों के साथ नया साल मनाने के लिए सिंघु बॉर्डर पर आएं और उनकी स्तिथि को समझें।

गौरतलब है कि इसके पहले किसान संगठन और मोदी सरकार के बीच पांच दौर की बातचीत हो भी चुकी है। जिसमें कोई भी खास निर्णय नहीं निकला। इसके बाद भी सरकार किसानों से बातचीत करने में लगी हुई थी। जिसके लिए कृषि मंत्रालय ने किसानों को दो बार चिट्ठी लिख कर बैठक के लिए समय और दिन तय करने का आग्रह किया था।

विदित हो कि देश के ‘अन्नदाता’ पिछले 31 दिन से दिल्ली-हरियाणा के सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर बैठे हुए हैं। मोदी सरकार किसानों को समझाने और मनाने के लिए हर कोशिश कर रही हैं और कृषि कानूनों कानून में 13 संसोधन करने को भी तैयार हैं। वहीं किसान भी अब तीनों कानूनों को ही वापिस लेने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।