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अयोध्या. जहाँ अयोध्या (Ayodhya)  में राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण कार्य अगले महीने शुरू होने वाला है। वहीं अब वहां होने वाले मस्जिद निर्माण (Babri Mosque) मामले पर एक नया मोड़ आ गया है। दरअसल मस्जिद निर्माण के लिए जिस डिजाइन (Design) को तैयार किया गया था। उसे अब बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी (Iqbal Ansari) ने खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वे किसी विदेशी मस्जिद नहीं वरन भारतीय शैली पर तैयार मस्जिद की डिजाइन को वे स्वीकार करेंगे। 

दरअसल अयोध्या (Ayodhya) में बाबरी मस्जिद (Babri Mosque) के स्थान पर फैजाबाद (Faizabad) के रौनाही के धन्नीपुर गांव में मस्जिद बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सरकार को 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था। जिसके बाद यहां पर मस्जिद का निर्माण होना था। लेकिन अब इस मस्जिद की डिजाइन पर गाडी अटक गयी है। बताया जा रहा है कि बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वे किसी विदेशी मस्जिद नहीं वरन भारतीय शैली पर तैयार मस्जिद की डिजाइन को ही स्वीकार करेंगे। 

इस मुद्दे पर इकबाल अंसारी का कहना है कि इस डिजाइन को अयोध्या ही नहीं, बल्कि देश का कोई भी मुसलमान इस मंजूर नहीं कर सकता क्योंकि यह विदेशी शैली की डिजाइन है। यही नहीं उनका यह भी कहना था कि कि 70 वर्षों से इस मस्जिद के लिए लड़ाई लड़ी गई, लेकिन आज अयोध्या के किसी भी पक्षकार से इस पर कोई भी सलाह नहीं ली गई है।

उनका कहना था की, “सुप्रीम कोर्ट ने 5 एकड़ जमीन को मस्जिद निर्माण के लिए दिया है। इस जमीन पर जो  मस्जिद बनाने वाला है वह विदेशी वास्तु कला के हिसाब से है इसलिए हमें यह डिजाइन मंजूर नहीं है। हम हिंदुस्तान के मुसलमान हैं और हिंदुस्तान के वफादार हैं। हम हमेशा हिंदू और मुस्लिमों के बीच में रहते हैं। मंदिर और मस्जिद की अपनी अलग-अलग पहचान होती है। मस्जिद निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट के द्वारा जारी किया गया नक्शा पूरी तरह विदेशी है।” उनका यह भी कहना था कि, “मस्जिद नमाज पढ़ने के लिए होती है, लेकिन जो नक्शा है वह विदेशी है, इसमें हिंदुस्तानी छाप नहीं दिखाई देती है। ऐसे में भारतीय मुसलमान ऐसे डिजाइन पर अपना पैसा बर्बाद नहीं कर सकता है।”

अपने गुस्से को दिखाते हुए बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने यह भी कहा कि, “अयोध्या के एक भी पक्षकार से इस प्रस्तावित मस्जिद की डिजाइन को लेकर कोई भी राय-मशवरा नहीं लिया गया। हमें तो हिन्दुस्तानी शैली पर ही मस्जिद चाहिए। इसलिए अभी के मस्जिद के डिजाइन का मैं पूरी तरह से विरोध करता हूं।”