जलयुक्त शिवार कामों में हुआ भ्रष्टाचार !

  • शीतकालीन सत्र में कराएंगे जांच की मांग: विधायक चौधरी

रावेर. रावेर तहसील में लगभग 13 करोड़ रुपये खर्च कर जलयुक्त अभियान के तहत काम दर्शाए गये हैं। कामों में तत्कालीन सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। इन भ्रष्टाचार हुए मामलों की जांच कराने के लिए शीतकालीन सत्र  में आवाज उठाएंगे। यह बात विधायक शिरीष चौधरी ने कही है।

उन्होंने कहा है कि तहसील में जलयुक्त अभियान के तहत हुए कामों में गड़बड़ी की ख़बरें आएं दिन सामने आ रही हैं। समाचार पत्रों द्वारा प्रकाशित इस तरह की खबरों की ओर अब तक अनदेखी की जा रही थी, पर अब इस ओर ध्यान देना आवश्यक है। भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

रावेर तहसील के 19 गांवों में लगभग 13 करोड़ रुपये खर्च से कई काम किये गयें हैं। इलाकों में जल स्तर बढ़ाने की दृष्टि से सरकार ने यह खर्चा किया। काम के दौरान तत्कालीन ठेकेदार और अधिकारियों ने कई जगहों पर अधूरे पड़े कामों को कागजों पर पूरा दिखाकर पैसा कमा लिया।

जलयुक्त के कई काम आदिवासी बहुल इलाकों में हुए। इसके बावजूद वहां का जल स्तर नहीं बढ़ा। इसको लेकर नागरिकों और किसानों में रोष है। इसलिए यह मुद्दा उठाना आवश्यक है। शिरीष चौधरी ने आगे बताया कि रावेर तहसील में 13 करोड़ रुपये खर्च से हुए कामों में गबन के साथ वह काम निचले दर्जे की होने की शिकायतें सामाजिक कार्यकर्ता और किसानों के द्वारा की गई है।

इसलिए यह कामों की जांच करने की मांग आगामी शीतकालीन सत्र में उठायी जायेगी। काम की जांच करते समय तत्कालीन अधिकारियों की ही जांच करवाई जाएगी। क्योंकि अधिकारियों की ही लापरवाही चलते जलयुक्त अभियान के काम हलके दर्जे के होकर इसमें गबन की शिकायतें भी आयी हैं। चौधरी ने कहा कि व्यापक पैमाने पर जांच अभियान चलाकर संबंधित दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.