File photo
File photo

    – सीमा कुमारी

    सनातन हिन्दू धर्म में पूर्णिमा तिथि का बड़ा महत्व होता है। वैशाख महीने पर पड़ने वाला पूर्णिमा ‘बुद्ध पूर्णिमा’ (Buddh Purnima) के नाम से जाना जाता है।

    बुद्ध पूर्णिमा’ भगवान बुद्ध का जन्मोत्सव है। इस साल यह पर्व 26 मई, बुधवार को है। यह पर्व बौद्ध धर्म मानने वाले लोगों का प्रमुख त्योहार होता है। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान बुद्ध भगवान विष्णु के नौवें अवतार माने जाते हैं।

    मान्यताओं के अनुसार, ‘बुद्ध पूर्णिमा’ के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विधिवत करने से भक्तों पर असीम कृपा सदैव बनी रहती है और मनोवांछित फल भी मिलता है।

    आइए जानें ‘बुद्ध पूर्णिमा’ का शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और इसकी महिमा:

    शुभ  मुहूर्त:

    पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 25 मई 2021 (रात 8:20 से लेकर)

    पूर्णिमा तिथि समाप्त – 26 मई 2021 (शाम 04:40 तक)

    पूजा-विधि:

    • हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, इस दिन सुबह स्नान से पहले व्रत का संकल्प लें।
    • पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें और स्नान से पूर्व वरुण देव को प्रणाम करें।
    • स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए।
    • स्नान से निवृत्त होकर भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए और उन्हें नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। अंत में दान-दक्षिणा दें।

    ‘बुद्ध पूर्णिमा’ का महत्व:

    ‘बौद्ध धर्म’ के मानने वाले लोगों का प्रमुख पर्व है ‘बुद्ध पूर्णिमा’। वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि पर बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। पूर्णिमा तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व माना गया है। भगवान बुद्ध को विष्णु जी का स्वरूप माना जाता है। भगवान बुध का जन्म 563 वर्ष ईसा पूर्व नेपाल के लुम्बिनी नगर में हुआ था। दुनिया को दिया गया भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग समस्त दुखों के निदान का मार्ग है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से मनुष्य के मन और शरीर पर पड़ता है।

    ज्योतिष विज्ञान में चंद्रमा को मन और द्रव्य पदार्थों का कारक माना जाता है। क्योंकि, इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण रूप में होता है। इसलिए आज के दिन व्यक्ति के मन पर पूर्णिमा का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। वहीं मनुष्य के शरीर में लगभग 80 फीसदी द्रव्य पदार्थ है। अतः पूर्णिमा को चंद्र ग्रह की पूजा का विधान है, ताकि मन और शरीर पर चंद्रमा का शुभ प्रभाव पड़े।