Coronavirus
Representational Pic

  • जरूरत 30 की, मिलेगी 12 लीटर

नागपुर. बेलगाम हो चुके कोरोना के कारण संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने मरीजों के लिए ऑक्सीजन का उपयोग करने का निर्णय लिया है. इसके आक्सीजन राशन नाम दिया जा रहा है जिसके तहत अब आईसीयू में भर्ती मरीजों को प्रति मिनट 12 लीटर जबकि वार्ड में भर्ती मरीजों को केवल 7 लीटर प्रति मिनट के हिसाब से आक्सीजन दी जायेगी.

जानकारों की मानें तो कोरोना मरीजों को प्रति मिनट 30 से 60 लीटर आक्सीजन की जरूरत होती है. सरकार ने यह निर्णय आक्सीजन सप्लाई में कालाबाजारी रोकने के लिए लिया हो लेकिन इस आक्सीजन राशन पर सवाल उठना तय है. केवल 12 लीटर प्रति मिनट के हिसाब से आक्सीजन देने पर कोरोना मरीज की मौत तय है.

जिलाधिकारियों को आदेश
सरकार की ओर से राज्य के सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे प्राइवेट हास्पिटलों में ऑक्सीजन की खपत ऑडिट करें. साथ ही सुनिश्चित करें कि लीक आदि के कारण कोई भी चिकित्सा ऑक्सीजन बर्बाद नहीं हुई है. वार्ड में 7 लीटर और आईसीयू में अधिकतम 12 लीटर आक्सीजन सप्लाई की मात्रा तय की जाये. साथ ही

आक्सीजन रिफिलिंग प्लांट में जांच अधिकारी नियुक्त करने को भी कहा गया है. सरकार को लगता है कि कई निजी अस्पताल बिलों को बढ़ाने के लिए मरीजों को ‘आवश्यकता से अधिक’ ऑक्सीजन दे रहे हैं. संयोग से, महाराष्ट्र में निजी अस्पतालों में 80 प्रतिशत बेड सरकार द्वारा नियंत्रित हैं जिस पर सब्सिडी वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जा रही है.

प्रतिदिन 600 मीट्रिक टन खपत
ज्ञात हो कि कोरोना के इलाज के लिए राज्य में आक्सीजन की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है. वर्तमान में प्रतिदिन 600 मीट्रिक टन आक्सीजन उपयोग की जा रही है जो सामान्य दिनों की स्थिति से कहीं अधिक है. केन्द्र सरकार ने भी राज्य सरकार को चेताया है कि राज्य के 15 प्रतिशत कोरोना मरीज आक्सीजन पर हैं. यह राष्ट्रीय औसत को 3 गुना है इसलिए हालात चिंताजनक है.

…तो खत्म हो सकती है आपूर्ति
हालांकि महाराष्ट्र में ही आक्सीजन उत्पादन किया जाता है. साथ ही पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश से भी सप्लाई की जाती है. लेकिन जिस गति से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उससे बहुत अधिक संभावना है कि राज्य में आक्सीजन की आपूर्ति कम पड़ जाये. सरकार इस बात से परेशान है. इस बारे में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ. प्रदीप व्यास ने कहा है कि विशेष रूप से प्राइवेट हास्पिटलों और नगरपालिका अस्पतालों में प्रतिदिन ऑक्सीजन की मात्रा और खपत की रिपोर्ट में भारी अंतर है. यदि ऐसी ही गति रही तो हमें बड़ी मात्रा में आक्सीजन की जरूरत पडेगी. वहीं, अधिक आक्सीजन उत्पादन की व्यवस्था करने के लिए कम से कम एक वर्ष का समय लग सकता है.

डरा रहे आंकड़े
व्यास ने कहा कि केन्द्र सरकार ने इस बारे में गंभीर चिंता जताई है. एक्टिव कोरोना केस का राष्ट्रीय औसत 5 से 6 मरीज का है जबकि महाराष्ट्र में यह आंकड़ा करीब 15 प्रतिशत है जो पूरे देश में सर्वाधिक है. यह ऑक्सीजन का विवेकपूर्ण उपयोग नहीं है.