Ambulence
Representational Pic

    पुणे.  पुणे महानगरपालिका कमिश्नर ने कोविड के अलावा अन्य सभी कामों को निधि ना देने के निर्देश दिए है। खरीदी भी सिर्फ कोविड से संबंधित सामग्री की की जा रही है,  लेकिन इससे नगरसेवक (Corporator) परेशान है।  इन लोगों को अपने निधि से कोई काम करने नहीं आ रहा है।  इस वजह से इन लोगों द्वारा एक तरकीब निकाली गई है जो है एम्बुलेंस (Ambulance) खरीदी। 

    नगरसेवकों के ऐसे लगभग 15-20 प्रस्ताव स्थायी समिति द्वारा मंजूर किए गए है,  लेकिन असल में पुणे महानगरपालिका (PMC) को अब ज्यादा एम्बुलेंस की आवश्यकता नहीं है,  लेकिन एम्बुलेंस पर सिर्फ अपना नाम आता है, इस वजह से ये लोग ऐसे प्रस्ताव (Proposal) दे रहे हैं।  साथ ही बाद में इसकी मरम्मत का खर्चा भी पीएमसी को ही करना पड़ेगा।  इसमें पीएमसी का ही नुकसान होगा। 

     सिर्फ कोविड के काम किए जा रहे है 

    ज्ञात हो कि शहर में कोरोना का प्रकोप जारी है।  इसकी रोकथाम को लेकर पीएमसी प्रशासन साथ ही राजनेताओं द्वारा प्रयास किए जा रहे है।  इसके तहत विभिन्न उपाय योजना की जा रही है।  हाल ही में पीएमसी कमिश्नर ने फैसला लिया था पीएमसी की निधि सिर्फ कोरोना के काम पर ही खर्च की जाए।  शेष काम सिर्फ देखभाल और दुरुस्ती के किए जाएंगे।  कमिश्नर के इस निर्देश के चलते नगरसेवकों को अपना निधि अपने प्रभाग में खर्च करने को लेकर परेशानी आ रही है।  इस वजह से इन लोगों द्वारा एक अजीब तरीका ढूंढा गया है।  कोविड के लिए एम्बुलेंस खरीदी के माध्यम से ये लोग अपना निधि खर्च करना जा रहे है,  लेकिन अब देखने को मिल रहा है कि पीएमसी को ऐसे ज्यादा एम्बुलेंस की आवश्यकता नहीं है।  फिर भी प्रस्ताव आ रहे हैं।  

     स्थायी समिति ने दी है मंजूरी 

    विगत माह से अब तक स्थायी समिति द्वारा ऐसे एम्बुलेंस खरीदी के करीब 15-20 प्रस्तावों को मंजूरी दी है।  कहा जा रहा है कि प्रस्ताव देने के पीछे नगरसेवकों की मंशा है।  एम्बुलेंस खरीदी करने के बाद उस पर पीएमसी का नाम डालने के बजाय नगरसेवक अपना नाम डालते है।  इससे नगरसेवकों की ब्रांडिंग होती है।  साथ ही उनके काम की पहचान होती है, लेकिन इसमें पीएमसी का कोई फायदा नहीं है क्योंकि फ़िलहाल पीएमसी को एम्बुलेंस की आवश्यकता नहीं है।  साथ ही जब कोविड का प्रकोप कम होगा, तब इसका इस्तेमाल भी नहीं होगा।  पीएमसी को उसके मरम्मत पर ही ज्यादा खर्चा करना पड़ेगा।  इस वजह से स्थायी समिति में इस तरह के खरीदी का विरोध किया गया।  साथ ही इसको लेकर एक नीति बनाने की मांग की गई।  

    सिर्फ अपने नाम के लिए एम्बुलेंस खरीदी के प्रस्ताव आ रहे हैं। साथ ही एम्बुलेंस की मरम्मत पर ही ज्यादा खर्चा करना पड़ेगा। हमारी मांग है कि एम्बुलेंस पर नगरसेवक का नाम ना डालकर सिर्फ पीएमसी का नाम डाला जाए।

    - बाला ओसवाल, नगरसेवक, शिवसेना

    एम्बुलेंस की आवश्यकता की स्वास्थ्य विभाग से हम जानकारी लेंगे। आवश्यकता के बाद ही खरीदी का प्रस्ताव कमिश्नर के पास भेजा जाएगा, लेकिन पहले एम्बुलेंस की आवश्यकता देखी जाएगी।

    -महेश कुमार डोईफोडे, उपायुक्त, पुणे महानगरपालिका