15 नवंबर को है स्नान-दान की अमावस्या, जानिए क्यों पड़ा अमावस्या नाम

आज यानी 14 नवंबर को देशभर में दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है। आज कार्तिक महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी के साथ अमावस्या तिथि के भी है। इसलिए इस दिन रूप चतुर्दशी और दीपावली दोनों की पूजा की जाएगी। वहीं इसके 15 नवंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि है। इस दिन स्नान और दान बहुत अधिक महत्त्व रहता है। साथ ही इस तिथि में पितरों के उद्देश्य से की गई पूजा फलदायक होता है। अमावस्या के दिन विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 

15 नवंबर को स्नान-दान अमावस्या-
स्कंद और भविष्य पुराण में बताया गया है कि कार्तिक महीने की अमावस्या पर तीर्थ स्नान और दान करने से हर पाप धूल जाते हैं। अगर आप कहीं तीर्थ स्थल नहीं जा पा रहे हैं तो इस दिन घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाने से भी तीर्थ स्नान का फल मिलता है। साथ ही अपनी श्रद्धा अनुसार दान करने से हर तरह के रोग, शोक और दोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन खासतौर से ऊनी कपड़ों का दान करना फलदायक होता है। भविष्य, पद्म और मत्स्य पुराण के अनुसार, इस दिन दीपदान के साथ ही अन्न और वस्त्र दान भी करना चाहिए। मान्यता के अनुसार कार्तिक महीने की अमावस्या पर किया गया हर तरह का दान अक्षय फल देने वाला होता है। 

अमावसु पितर के कारण अमावस्या नाम पड़ा-
मत्स्य पुराण के 14वें अध्याय की कथा के अनुसार, पितरों की  एक कन्या का नाम मानस था। उन्होंने बहुत कठिन तपस्या की थी। उन्हें वरदान देने के लिए कृष्णपक्ष की पंचदशी तिथि पर सभी पितर आए थे। उनमें बहुत ही सुंदर अमावसु नाम के पितर को देखकर वो कन्या आकर्षित हो गई और उनसे विवाह करने की इच्छा करने लगी, लेकिन अमावसु ने विवाह के लिए मना कर दिया और अमावसु के इसी धैर्य के कारण उस दिन की तिथि पितरों के लिए बहुत ही प्रिय हो गई। इसलिए अमावसु के नाम से ये तिथि अमावस्या कहलाने लगी।