किसानों के आक्रोश से हरियाणा के BJP नेता त्रस्त और भयभीत

    केंद्र के तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर किसानों के 6 माह से जारी आंदोलन से माहौल इतना तप गया है कि बीजेपी नेता हरियाणा में जनता के बीच जाने से भी घबराने लगे हैं. जिन लोगों ने उन्हें चुना, वे ही उनसे नाराज हैं. कुछ नेताओं की गांवबंदी तक कर दी गई है. कोरोना संकट के बावजूद किसानों का धरना आंदोलन चलता रहा और अब तो पिछले 10 दिनों में अकेले कुंडली बॉर्डर पर 15,000 तक किसान जमा हो गए हैं तथा अभी भी हरियाणा और पंजाब से उनके पहुंचने का सिलसिला जारी है. इसके पूर्व वहां 7,000 के आसपास किसान धरना दे रहे थे.

    जनवरी के बाद से सरकार और किसानों के बीच बातचीत बंद है. इसके पूर्व किसान नेताओं व केंद्र सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत हुई थी लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला. सरकार ने 3 में से 1 कृषि कानून फिलहाल लागू न करने का प्रस्ताव रखा था जो किसान नेताओं को नहीं जंचा. वे तीनों कानूनों को रद्द करने और एमएसपी को कानूनी दर्जा देने की मांग पर अड़े हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति को भी किसान नेताओं का कोई प्रतिसाद नहीं मिला. सरकार मानकर चल रही थी कि किसान थककर वापस लौट जाएंगे और आंदोलन समय बीतने के साथ ठंडा पड़ जाएगा.

    ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. कोरोना संकट और गर्मी के बीच भी किसानों का धरना जारी रहा. बीजेपी नेताओं ने यह भी टिप्पणी की थी कि असली किसान तो खेतों में काम कर रहे हैं और यह आंदोलन आढ़तियों व सरकार विरोधियों का है. लाठी प्रहार व पानी की तेज बौछार से भी किसान आंदोलनकारी नहीं घबराए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भेजने के बाद भी जब सरकार से बातचीत का रास्ता नहीं खुला तो किसानों का गुस्सा बढ़ने लगा. पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर किसान नेताओं से चर्चा कर चुके हैं लेकिन बात नहीं बनी.