क्या BJP में अब किसी काम के नहीं रहे मेनका और वरुण गांधी

    बीजेपी शुरुआत में यह दिखाना चाहती थी कि यदि कांग्रेस के पास सोनिया और राहुल गांधी हैं तो उसके पास भी मेनका और वरुण गांधी हैं. जेठानी कांग्रेस में तो देवरानी बीजेपी में! देश की राजनीति में ‘गांधी’ नाम का जो प्रभाव है, उसे भी बीजेपी मेनका और वरुण के जरिए भुनाना चाहती थी. बीजेपी की कार्यशैली अनुशासन के नाम पर अपने नेता-कार्यकर्ताओं को संयमित व मौन रखने की है. वहां मुखर होने वाले नेता पसंद नहीं किए जाते. बोलने का अधिकार मोदी और शाह को ही है. दूसरा कोई यदि खुलकर बयानबाजी करता है तो उसे पसंद नहीं किया जाता. पार्टी लाइन पर या हिंदुत्व के पक्ष में कोई बोलता है तो ठीक है लेकिन यदि पार्टी और सरकार को अप्रिय विषय पर किसी ने टिप्पणी की तो बीजेपी नेतृत्व उसे बर्दाश्त नहीं करता.

    मेनका व वरुण गांधी तथा संघ संस्कृति में पले-बढ़े भाजपाइयों के बीच बहुत फर्क है. ये मां-बेटे अपना स्वतंत्र चिंतन रखते हैं और आंख मूंद कर पार्टी लाइन पर नहीं चलते. मेनका गांधी के बारे में कहा जा सकता है कि यद्यपि वे केंद्र में महिला और बाल विकास मंत्री बनाई गई थीं लेकिन उनका अधिक ध्यान पशुक्रूरता निवारण पर था. अब भी उनके इस विषय पर लेख आते हैं. मेनका यूपी के सुल्तानपुर से और वरुण गांधी पीलीभीत से बीजेपी सांसद हैं. मेनका 4 बार केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं. उन्हें मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्री पद नहीं दिया गया. उनकी जगह स्मृति ईरानी को महिला बाल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई. मेनका को 2019 में लोकसभा चुनाव का टिकट देते समय पहले ही बता दिया गया था कि उन्हें मंत्री पद नहीं दिया जाएगा. इसकी वजह यह बताई गई कि बीजेपी में एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति के चुनाव लड़ने की परंपरा है. इस तरह बीजेपी ने पहले ही व्यवस्थित तरीके से मेनका को किनारे लगाया.

    राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर का रास्ता दिखाया

    बीजेपी हाईकमांड ने पार्टी लाइन से बाहर जाकर बयान देने वाले अपने नेताओं को कड़ा संदेश देते हुए पार्टी सांसद मेनका गांधी, वरुण गांधी, डा. सुब्रमण्यम स्वामी तथा पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. बीरेंद्र सिंह ने किसान आंदोलन का समर्थन किया था. पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी 2 वर्ष बाद गठित की गई जिसमें 309 सदस्य हैं. 80 सदस्यों के साथ 50 विशेष आमंत्रित सदस्य तथा 179 स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे लेकिन बगावती तेवर दिखाने वाले नेताओं को बाहर ही रखा गया. लखीमपुर-खीरी की घटना के बाद से वरुण गांधी ट्वीट कर बीजेपी हाईकमांड को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे.

    वरुण ने मामले को सार्वजनिक रूप से उठाकर पार्टी को यह संकेत दे दिया था कि वे बयानों से पीछे नहीं हटेंगे और निष्कासन सहित किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हैं. उन्होंने लखीमपुर मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर दबाव बनाया और अपने टि्वटर बायो से बीजेपी को हटाया, जिससे पार्टी नेतृत्व उनसे नाराज था. वरुण गांधी ने मृतक किसानों को शहीद करार देते हुए यह भी कहा था कि किसानों को एमएसपी कितना मिला है? जो लोग किसान हित की बात करते हैं, उन्हें इसका पता करना चाहिए. आंदोलनकारी किसानों के मंच पर उनकी मौजूदगी से पार्टी असहज थी.

    पार्टी टिकट नहीं देगी

    पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर वरुण गांधी का यही बगावती तेवर कायम रहता है तो संभव है कि उन्हें अगली बार लोकसभा चुनाव में पार्टी के टिकट से वंचित होना पड़े. वरुण ने एक वीडियो ट्वीट किया था जिसमें नजर आ रहा है कि काले रंग की एक एसयूवी शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करते किसानों को कुचलती जा रही है. वरुण ने यह भी कहा था कि यह वीडियो आत्मा को झकझोर देने वाला है. वरुण के साथ ही 7 बार से सांसद उनकी मां मेनका गांधी ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे किसानों की हत्या करार दिया. इसी तरह सुब्रमण्यम स्वामी भी बीजेपी हाईकमांड और प्रधानमंत्री मोदी के लिए कई बार असहज स्थिति पैदा कर चुके हैं. उन्होंने यह कहते हुए सरकार पर निशाना साधा कि पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम देश के ईमानदार लोगों के साथ त्रासदी से कम नहीं है.