खतरे में नवनीत राणा की सांसदी, नैतिक आधार पर इस्तीफा देने से छवि बनी रहेगी

    बाम्बे हाई कोर्ट ने अमरावती की निर्दलीय सांसद नवनीत राणा का जाति प्रमाणपत्र रद्द कर दिया और उन पर 2 लाख रुपए जुर्माना भी किया. इससे उनकी लोकसभा सदस्यता खतरे में पड़ गई है. नवनीत राणा मई 2019 के लोकसभा चुनाव में अमरावती की अनुसूचित जाति की आरक्षित सीट से निर्वाचित हुई थीं. उन्होंने स्वयं ‘मोची’ अनुसूचित जाति का होने का सर्टिफिकेट पेश किया था. 2017 के एक आदेश में भी उनके प्रमाणपत्र को वैध बताया गया था.

    न्यायमूर्ति आरडी धानुका और न्यायमूर्ति वीजी बिष्ट ने अपने आदेश में कहा कि अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के लिए नवनीत राणा ने जानबूझकर धोखाधड़ी की और अ.जा. का प्रमाणपत्र हासिल किया. खंडपीठ ने राणा को 6 सप्ताह में फर्जी जाति प्रमाण सरकार के पास जमा करने का आदेश दिया. लोकसभा चुनाव में नवनीत राणा के निकटतम प्रतिद्वंद्वी पूर्व केंद्रीय मंत्री व शिवसेना नेता आनंदराव अड़सूल की याचिका पर हाई कोर्ट ने यह निर्णय दिया.

    इस फैसले से विचलित न होते हुए नवनीत राणा ने कहा कि वे हाई कोर्ट के निर्णय को अवकाश के बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी. उन्होंने दावा किया कि जाति जांच समिति ने 3 बार जाति प्रमाणपत्र की छानबीन कर इसे वैध होने की रिपोर्ट दी थी. निर्दलीय प्रत्याशी नवनीत राणा को लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, एनसीपी और रिपा ने समर्थन दिया था. उचित होगा कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद नवनीत राणा नैतिक आधार पर सांसदी से इस्तीफा दे दें. इससे जनता के बीच उनकी छवि बनी रहेगी.