कोरोना : बड़ी कंपनियां मालामाल, छोटे दूकानदार हुए बर्बाद

    रिजर्व बैंक की रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि बड़ी कंपनियां मालामाल हो रही हैं, उन्होंने आपदा में अवसर खोज लिया. वहीं छोटे शहरों और कस्बों में बसे छोटे-छोटे दूकानदारों की लुटिया लुट गई है. बर्बाद हो गए हैं. बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं. 10,000 तो बंद भी हो गए हैं. ये पहली लहर से बच गए थे, दूसरी लहर में पूरी तरह से बह गए. स्पष्ट है रिपोर्ट ने सरकार की ही पोल खोल कर रख दी है. बता दिया गया है कि गांवों तक सरकारी मदद नहीं पहुंच पाई हैं. छोटे-छोटे दूकानदारों के लिए पेश योजनाएं कागजों तक सीमित रह गई है, जबकि 20 लाख करोड़ के पैकेज में इनके भी हिस्से थे.

    रिपोर्ट कहती हैं कि बड़ी कंपनियां ‘विपदा में अवसर’ का लाभ लेते हुए मालामाल हो गई हैं और छोटे, गृह एवं कुटीर उद्योग का बंटाढार हो गया है. बड़ी कंपनियों ने उपलब्ध संसाधनों के बल पर जमकर माल कमाया, वहीं छोटी कंपनियां महामारी का शिकार हो गईं. रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि उबरने की कोशिश में लगे उद्यमों को दूसरी लहर ने बड़ा नुकसान पहुंचाया. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में असर बहुत ज्यादा दिखा. छोटे-छोटे दूकानदारों का धंधा चौपट हो गया और सड़क पर आ गए. महामारी से देशभर में मोबाइल की 10 हजार दुकानें बंद हो चुकी हैं. बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों ने इनकी जगह ले ली है. देश के 49 फीसदी स्टार्टअप और एमएसएमई के पास फंड नहीं बचा.

    मतलब साफ है, केंद्र सरकार डींग ज्यादा हांकती रही, जमीन पर कुछ भी नहीं उतर पाया. गरीबों के लिए योजनाएं बनीं और पेश होती रहीं. वास्तविकता यह है कि पैसे बैंकों के माध्यम से गरीबों और जरूरतमंदों तक पहुंचे ही नहीं. बैंकों में ही पड़े रह गए. रिजर्व बैंक की रिपोर्ट ही बता रही है कि ग्रामीण और छोटे शहरों के छोटे-छोटे दूकानदार बेहाल और बदहाली की स्थिति में पहुंच गए हैं और कई बर्बाद हो गए. सरकार की इस नीति से भविष्य में अमीरी और गरीबी के बीच खाई का बढ़ना तय है.