जांच एजेंसियों की मार्फत एक दूसरे को घेर रहे, केंद्र और महाराष्ट्र में ठनी

    केंद्र की बीजेपी सरकार और महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार के बीच कटुता बढ़ती ही जा रही है. वैमनस्य इतना तीव्र हो गया है कि दोनों ही सरकारें अपनी जांच एजेंसियों के मार्फत एक-दूसरे को घेरने की सक्रियता दिखा रही हैं. बीजेपी महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार को भ्रष्टाचार में लिप्त साबित करना चाहती है. इस उद्देश्य से बीजेपी नेता व पूर्व सांसद किरीट सोमैया तथा बीजेपी के अन्य नेता आघाड़ी सरकार के मंत्रियों व नेताओं पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं. गंभीर आरोपों की वजह से ठाकरे सरकार की काफी किरकिरी हुई है. केंद्र के पास सीबीआई, आईबी, आयकर विभाग व ईडी जैसी एजेंसियां हैं तो राज्य के पास भी उसकी पुलिस व क्राइम ब्रांच है. पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को गिरफ्तार कर राज्य सरकार अपनी शक्ति का अहसास करा चुकी है.

    मंत्रियों के बिल्डर मित्रों पर आयकर छापा

    आयकर विभाग ने महाविकास आघाड़ी के बड़े नेताओं के करीबी सहयोगियों, खासतौर पर बिल्डर मित्रों के कार्यालयों और घरों समेत 40 ठिकानों पर छापेमारी की. मुंबई, ठाणे व पुणे में एकसाथ छापे मारे गए. इससे हड़कंप मचना स्वाभाविक था. जिन बिल्डरों के ठिकानों पर छापे मारे गए, वे महाराष्ट्र के कद्दावर मंत्रियों एकनाथ शिंदे, सुभाष देसाई, अशोक चव्हाण और जितेंद्र आव्हाड के निकटवर्ती हैं. पुणे के डेवलपर जयंत शाह, मुंबई के प्रशांत निलावार, गिरीश पवार और कीर्ति कावेडिया के ठिकानों पर छापे पड़े. जयंत शाह को अशोक चव्हाण का करीबी माना जाता है. बिल्डर गिरीश पवार सुभाष देसाई के पुत्र का नजदीकी है, जबकि कीर्ति कावेडिया को जितेंद्र आव्हाड का करीबी बताया जाता है. इनकम टैक्स विभाग को इन बिल्डरों के ठिकानों से अहम दस्तावेज मिले. विभाग राजनेता-बिल्डर मिलीभगत की पड़ताल कर रहा है. इस छापेमारी से क्या हासिल होता है, इस पर सभी का ध्यान है. कुछ दिनों पहले आयकर विभाग ने एनसीपी नेता व पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के ठिकानों पर छापेमारी की थी. इस जांच में देशमुख की 17 करोड़ रुपए की छिपी संपत्ति का खुलासा हुआ था. इसी तरह आयकर विभाग ने अभियंता सोनू सूद के यहां भी 2-3 दिन छापेमारी जारी रखी. कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को उनके गांव पहुंचाने में मदद देकर चर्चा में आए सोनू सूद ने पिछले दिनों दिल्ली के सीएम व आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी. इसके बाद से ही सोनू सूद आयकर विभाग के निशाने पर आ गए.

    ठाकरे सरकार भी घेरेगी

    राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार के मंत्रियों व नेताओं पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं. इससे तिलमिलाकर ठाकरे सरकार ने प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी के नेताओं को उन्हीं की भाषा में जवाब देने का निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में पिछली देवेंद्र फडणवीस की सरकार के समय हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच कराने का फैसला किया गया. सरकार ने 3 मंत्रियों को भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज जमा करने की जिम्मेदारी सौंपी है. विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दरेकर पर शिकंजा कसने के लिए मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की अनियमितता की गहराई से जांच कर 3 महीने में रिपोर्ट देने का आदेश सहकरिता विभाग को दिया गया. इस बैंक के अध्यक्ष प्रवीण दरेकर हैं. जिला उपनिबंधक प्रताप पाटिल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. यह भी कहा गया कि फडणवीस सरकार के समय कुछ अधिकारी मालामाल हुए हैं जिन्होंने मुंबई, पुणे व नागपुर में बड़े पैमाने पर संपत्ति जमा की है. उनकी भी जांच की जानी चाहिए.