शहरी क्षेत्रों में बढ़ी बेरोजगारी

    बेहद चिंता की बात है कि जीडीपी में वृद्धि के बावजूद देश के शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ी है. 28 नवंबर को समाप्त में अर्बन अन्ड एम्पलायमेंट की दर बढ़कर 8.75 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई जो कि 11 हफ्ते में सर्वाधिक है. इसके विपरीत ग्रामीण बेरोजगारी दर घटकरा 6.11 फीसदी पर आ गई जो कि 21 नवंबर को समाप्त हफ्ते में 7.04 फीसदी थी. इस तरह ग्रामीण बेरोजगारी दर में 0.93 फीसदी गिरावट की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी में गिरावट आई है. ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के अलावा अन्य छोटे-मोटे रोजगार रहते हैं मनरेगा में भी काम किया जाता है लेकिन समस्या शहरों में है. 

    शहरों में इन्वेस्टमेंट नहीं हो रहा और नए उद्योग नहीं खुल रहे. पुराने उद्योग या तो बंद होते चले गए या उनकी हालत पतली होने से कर्मचारी कम किए गए. नए लोगों को रोजगार देना तो दूर की बात है. नए सिरे से निवेश होकर इंडस्ट्री नहीं लगा रही है इसलिए रोजगार के अवसर नहीं बन पा रहे हैं. इसके अलावा सफेदपोशी उच्चशिक्षित शहरी युवाओं की तादाद बढ़ रही है लेकिन उद्योग अपने यहां ऐसे तैयार व्यक्ति को रखना चाहते हैं तो पहले से हुनरमंद और अनुभव कला हो.

    रोजगार देने या एम्प्लायिलिटी में अनुभवहीन या बिल्कुल कोरे लोगों को मौका नहीं दिया जाता. इसलिए शिक्षा संस्थानों और उद्योगों से तालमेल रखकर ही इस समस्या का निदान निकाला जा सकता है. उद्योगों के परामर्श से पाठ्यक्रम इस तरह डिजाइन किया जाए कि प्रशिक्षित युवा तैयार हों जो तुरंत रोजगार पाने लायक बनें. उद्योग भी चाहते कि वे किसी को भर्ती कर प्रशिक्षण देते बैठें. उन्हें तैयार व्यक्ति चाहिए.