
औरंगाबाद : शहर के मौलाना आजाद कॉलेज (Maulana Azad College) में कार्यरत अंग्रेजी विषय के प्राध्यापक डॉ. राजन शिंदे की 11 अक्टूबर के तड़के क्रुरता से हत्या की गई थी। इस हत्याकांड को उजागर करने में औरंगाबाद पुलिस एक सप्ताह बाद कामयाब हुई। प्रा. राजन शिंदे (Professor Rajan Shinde) की हत्या पारिवारिक विवाद में घर के नाबालिग बेटे (Minor Son) ने की।
पुलिस ने प्रा. शिंदे की हत्या में इस्तेमाल किए सभी हथियारों को जब्त कर लिया है। प्रा. शिंदे की हत्या करने के बाद नाबालिग बेटे ने हत्या के लिए इस्तेमाल किए सभी हथियार घर के निकट स्थित कुंए में फेंके थे। बीते तीन दिन से पुलिस ने कुंए में जमा लाखों लिटर पानी बहाकर हत्या में इस्तेमाल किए सभी हथियार कुंए से बाहर निकाले। हत्या के लिए इस्तेमाल किए सारे हथियार मिलने के बाद पुलिस ने प्रा. शिंदे के हत्यारे नाबालिग बेटे को गिरफ्तार किया।
शहर के डीसीपी जोन-2 के उपायुक्त दीपक गिरहे ने बताया कि प्रा. शिंदे के हत्या का मामला उजागर करने के लिए शहर की मुकुंदवाडी और क्राइम ब्रांच पुलिस दिन-रात जांच में जूटी हुई थी। शहर के सीपी डॉ. निखिल गुप्ता ने इस घटना को काफी गंभीरता से लेकर जांच कर रहे अधिकारियों को मार्गदर्शन किया। जांच के दरमियान हमें नाबालिग बेटे ने हत्या करने की जानकारी मिली। तब पुलिस ने प्रा. शिंदे के नाबालिग बेटे को कब्जे में लेकर पूछताछ करने पर उसने प्रा. शिंदे की हत्या करने की बात कबूली। डीसीपी गिरहे ने बताया कि नाबालिग हत्यारे ने चालाकी से प्रा. शिंदे की हत्या की थी। जिसके चलते हम सबसे पहले सबूत के फिराक में जूटे हुए थे।
घर के निकट कुंए में फेंके थे हथियार
डीसीपी डॉ. दीपक गिरहे ने बताया कि प्रा. शिंदे के हत्या के लिए इस्तेमाल किए हथियार जब्त करने के काम में पिछले तीन दिन से पुलिस जूटी हुई थी। सोमवार की सुबह हमने नाबालिग बेटे द्वारा प्रा. शिंदे की हत्या के लिए इस्तेमाल किया डंबेल, चाकू, टॉवेल और अन्य सामग्री कुंए से जब्त की। प्रा. शिंदे की हत्या का मामला उजागर होने के बाद पुलिस के समक्ष हत्यारे को पकड़ना एक चुनौती भरा काम था। पुलिस बीते एक सप्ताह से आरोपी को पकड़ने में जूटी हुई थी। उन्हें सोमवार को कामयाबी मिली।
प्रा. शिंदे अपने घर में काफी सख्त थे
उधर, पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रा. शिंदे अपने घर में काफी सख्त रहते थे। उनका अपने परिवार में मनमुटाव था। जिससे परिवार के सदस्य उनकी गुस्से भरे स्वभाव से काफी नाखुश थे। घटना से पूर्व रविवार की रात आरोपी नाबालिग बेटा और प्रा. शिंदे के बीच घर में जमकर विवाद हुआ था। इसी विवाद में उसने देर रात प्रा. शिंदे की क्रूरता से हत्या की थी। प्रा. शिंदे हमेशा अपने नाबालिग बेटे को निचले शब्दों का इस्तेमाल कर उस पर हमेशा गुस्सा करते थे। जिससे नाबालिग के मन में प्रा. शिंदे के खिलाफ काफी गुस्सा था। उसी गुस्से में उसने सोमवार के तड़के अपने पिता की हत्या की।
पुलिस का शक परिवार के निकट के सदस्य पर था
पुलिस ने जांच में पाया कि जिस नाबालिग बेटे ने प्रा. शिंदे की हत्या की, वह पिछले कई माह से हत्याओं से संबंधित कई मुवी देख रहा था। उसने 11 अक्टूबर के तड़के प्रा. शिंदे के सिर पर डंबेल से वार करने के बाद घर में सब्जी काटने के लिए रखे चाकू से गला चिरने के साथ ही हाथ के नसों को भी काटा था। गौरतलब है कि 11 अक्टूबर की सुबह प्रा. शिंदे की हत्या होने का मामला उजागर हुआ था। घटना के उजागर होते ही पुलिस का शक परिवार के निकट के सदस्य पर ही था। प्रा।शिंदे की हत्या के समय घर से किसी प्रकार का सामान चोरी न होने से पुलिस प्रा. शिंदे की हत्या को लेकर सक्ते में थी। घटना की जानकारी शहर के पुलिस आयुक्त डॉ. निखिल गुप्ता को मिलने पर वे घटनास्थल पहुंचे थे, और उन्होंने मामले को गंभीरता से लेकर इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी थी। क्राइम ब्रांच और मुकुंदवाडी थाना की टीम ने दिन रात मेहनत कर प्रा. शिंदे की हत्या का मामला उजागर करने में कामयाबी हासिल की। यह कार्रवाई शहर के सीपी डॉ. निखिल गुप्ता, डीसीपी दीपक गिरहे के मार्गदर्शन में क्राइम ब्रांच के पीआई अविनाश आघाव, गौतम पातारे, गीता बागवडे, एपीआई अजयसिंह जारवाल, मनोज शिंदे, श्रध्दा वायदंडे, उपनिरीक्षक दत्ता शेलके, इंगले, सुनीता फसाटे सहित 30 कर्मचारियों ने पूरी की।