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    भंडारा. पिछले महीने हुई भारी बारिश के बाद पिछले 10-15 दिनों से बारिश नदारद है.  तापमान बढ़ने से खेती की जमीन में दरार आ गई है और फसल सुखने लगी है.कुछ किसानों की बुआई भी लटक गई हैं. इस स्थिति में किसान आसमान की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है. लेकिन वरुण राजा ने अपनी आंखे फेर ली है,इससे किसान बेबस हो गए हैं. जिले में उपसा सिंचाई और प्रचुर मात्रा में जल भंडारण की सुविधा है.लेकिन अभी तक नहरों से पानी नहीं छोड़ा गया है.इसी कारण धान उत्पादक किसान परेशान हैं.किसानों की ओर से सवाल किया जा रहा है कि जब खेतों की फसल पानी के अभाव में झुलस जाएगी तब सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा?

    जिले के किसानों को सुजलम सुफलम बनाने के लिए वैनगंगा नदी पर गोसेखुर्द बांध का निर्माण किया गया था. बांध में पानी जमा होने के कारण वैनगंगा नदी में बारह माह तक पानी रहता है.जरूरत पड़ी तो बांध के बाएं और दाएं नहरों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है. साथ ही वैनगंगा नदी पर नेरला और करचखेड़ा के पास उपसा सिंचाई योजनाएं लागू की गईं. इसके अलावा, मोहाड़ी और तुमसर तहसील में सिंचाई के लिए बावनथडी नदी पर बनाए गए बांध से पानी छोड़ा जाता है.

    भंडारा और मोहाड़ी तहसील के कुछ क्षेत्रों में पेंच परियोजना के माध्यम से सिंचाई की जाती है.  8 से 15 जुलाई के बीच हुई भारी बारिश के कारण जिले के कुछ हिस्सों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई, जिससे कृषि और घरेलू पशुओं के साथ-साथ मकानों को भी व्यापक नुकसान हुआ है. लेकिन उसके बाद बारिश ने लिंबे समय तक आंखें फेर ली है.  पिछले 15-20 दिनों से बारिश थम गई है. तापमान में वृद्धि के कारण कृषि भूमि में पानी गायब हो गया है और जमीन में दरार आ गई है.रोपित फसल सुखने लगी हैं.किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हुई है.जिले में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने पर भी नहरों से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है. किसानों ने जल्दी ही पानी छोड़ने की मांग की है.