कार्यालयों में ही उडती स्वच्छता आभियान की धज्जिया – नागरिकों में कैसे होगी जनजागृति

  • स्वच्छ भारत मिशन का ख्वाब अधुरा

सिरोंचा. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत आभियान इन दिनो शहर के कार्यालयों मे ही दम तोडती नजर आ रही है. जबकी इस दिशा मे केंद्र एवं राज्य की सरकार देश को गंदगी से मुक्ति दिलाने के नाम पर करोडों खर्च करते हुए आभियान छेडी हुई है. मगर कार्यालय के परिसर में इच्छाशक्ती एवं उदासीनता के चलते यह आभियान वेंटिलेटर पर होने जैसे प्रतित हो रहा है. या एक तरह से कहा जाये तो इसको लेकर गंभिरता नही दिखाई जा रही है.

जबकी हाल के समय मे कोरोना महामारी के संक्रमण के मद्देनजर स्वच्छता को व्यापक महत्व दिया गया था. मात्र जब सरकारी कार्यालयों में ही स्वच्छता की धज्जीयां उड रही है, तो आमजन स्वच्छता के प्रति कैसे जागृत होंगे, यह सवाल उठाया जा रहा है. जिससे पंतप्रधान के स्वच्छ भारत का ख्वाब कैसे पूर्ण होगा, ऐसा सवाल भी उठाया जा रहा है.

बतां दे कि, बीते कुछ वर्षों से देखा जा रहा है की 2 अक्टूंबर के दौरान जनप्रतिनिधि, आधिकारी, कर्मचारी हाथों मे झाडू पकडे हुए फोटो सेशन करते जरूर नजर आ जाते है. मगर उसके बाद रात गयी बात गयी की तर्ज दिखता है. अभियान को भूल जाते है. इसके चलते आसपास के परिसर मे जैसे थे वाली हालात निर्मित होने लगी है. आज के हालतों में स्थानीय कार्यालयों के परिसर में सरकार के स्वच्छ भारत अभियान की धज्जीया उडती दिखाई दे रही है.

इसमे कुछ हद तक इन कार्यलयों मे पहुंचने वाले लोग भी जिम्मेदार है. अक्सर देखा जाता है की लोग भी लापरवाही का परिचय देते हुए खर्र, गुटका खाकर जहां चाहे वहां थूकने लगते है. यह नजारा अधिकतर कार्यालयों के दिवारो पर देखने को मिल जाता है.इसके अलावा फल खाकर उनके छिलके भी फेक देते है. 

वही सार्वजनिक स्थलों पर नगर पंचायत इस दिशा मे प्रयासरत नजर आता है . मगर अन्य विभागीय कार्यालयों पर आज भी गंदगी का आलम बना हुआ है. इसको लेकर इन कार्यलयों के जिम्मेदारों को इच्छाशक्ति दिखाने की जरुरत है. ताकी यह समस्या नासूर ना बन जाये. वही सिरोंचा जिसे मलेरिया एवं टाईफायड़ जोन कहा जाता है. जहा अक्सर इस बीमारी के चपेट मे लोग आ जाते है. इन बीमारियों का मुख्य कारण मच्छर , गंदगी, एवं दूषित जल को माना गया है.