Night college started in Jambhali, Gondwana's 'University in our village' initiative

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उन्नत भारत अभियान का राज्य का पहला प्रयोग गड़चिरोली में 

गड़चिरोली. गड़चिरोली, चंद्रपुर जिले के आदिवासी, दुर्गम क्षेत्र के अनेक गांवों के युवकों में उच्च शिक्षा का प्रमाण नहीं दिखाई देता है. वहीं अनेक विद्यार्थियों में शिक्षा यह आधे में छोड दी जाती है. यह बात ध्यान में लेकर गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलगुरू डा. प्रशांत बोकारे के संकल्पना से ‘विश्वविद्यालय अपने गांव में’ यह उपक्रम शुरू किया गया है. यह राज्य का पहला प्रयोग है. रात्रिकालीन स्कूल के तरह यह उपक्रम चलाया जा रहा है. 

धानोरा तहसील अंतर्गत जांभली में ‘आदर्श स्नातक महाविद्यालय द्वारा आयोजित ‘विश्वविद्यालय अपने गांव में’ इस उपक्रम का उद्‌घाटन 27 मार्च को वरीष्ठ समाजसेवक देवाजी तोफा के हाथों किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलगुरू डा. प्रशांत बोकारे ने की. विशेष अतिथी के रूप में प्र- कुलगुरू डा. श्रीराम कावले, कुलसचिव डा. अनिल हिरेखन, संचालक परीक्षा व मूल्यमापन डा. अनिल चिताडे, नवसंशोधन केंद्र के संचालक डा. मनीष उत्तरवार, विद्या बोकारे,  जांभली ग्राम पंचायत के सरपंच विलास कुंभरे, उपसरपंच पुरुषोत्तम बावणे, वामन लोहंबरे, चंद्रकुमार उसेंडी, मधुकर मडावी, विलास दरडे उपस्थित थे. कार्यक्रम की प्रस्तावना प्राचार्य डा. शशिकांत अस्वले ने रखी. संचालन समन्वयक डा. संदीप लांजेवार ने किया, आभार उन्नत भारत अभियान के समन्वयक डा. नंदकिशोर माने ने माना. 

विवि की भूमिका महत्वपूर्ण: डा. तोफा

गोंडवाना विश्वविद्यालय के उपक्रम व्यापक समाज उपयोगी है. विश्वविद्यालय को मिले कुलगुरू यह गड़चिरोली जिले के लिए मार्गदर्शक है. अधिकारी आऐंगे, और जाऐंगे. किंतु उनके द्वारा किए गए कार्य हमेशा याद रहते है. इसका बडा उदाहरण यानी गोंडवाना विवि द्वारा निर्माण किया यह दूरदृष्टीकोण उपक्रम ‘विवि अपने गांव में’ यह है. जिससे हर गांव के सर्वांगिन विकास में विश्वविद्यालय की भूमिका महत्वपूर्ण होने का कथन वरीष्ठ समाजसेवक डा. देवाजी तोफा ने किया. 

विद्यार्थी उपक्रम में ले सहभाग: कुलगुरु

हर व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार है. शिक्षा यह स्वयं के सर्वांगीण व समाज के विकास के लिए व्यापक पुरक माध्यम होनेवाला हथियार है. गांव के पिछडेपन पर शिक्षा यह एक साधान निर्माण हो, इसलिए गोंडवाना विश्वविद्यालय ने ‘विश्वविद्यालय अपने गांव में’ इस उपक्रम को चलाकर गांव के सर्वांगिन विकास में एक कदम बढाने का प्रयास किया है. विद्यार्थी इस उपक्रम में बडी संख्या में सहभाग ले, अब रोजगार, शिक्षा से दूर जाने की जरूरत नहीं है, ऐसी बात कुलगुरू डा. प्रशांत बोकारे ने कहीं. 

पहिले क्लासेस में 22 छात्रों को प्रवेश

इस उपक्रम अंतर्गत जांभली ग्राम पंचायत में महाविद्यालय छोडे विद्यार्थियों का सर्वेक्षण कर उन विद्यार्थियों में शिक्षा की रूचि निर्माझा की गई. उन विद्यार्थियों को पुनप्रवेशित कर इस उद्घाटन समारोह के बाद प्रत्यक्ष कक्षा आयोजित कर क्लासेस शुरू किए गए. इस दौरान शिक्षा से दूर गए विद्यार्थियों के मन परिवर्तित कर शिक्षा के मुख्य धारा में लाने के लिए हुए प्रयासों से 22 विद्यार्थी प्रवेशित हुए. उन सभी विद्यार्थियों को पौधा देकर उनका उत्साह बढाने का प्रयास किया गया. इस समय गांव के पूर्व सरपंच मधुकर मडावी ने नोटबुक व पेन देकर छात्रों का उत्साह बढाने का प्रयास किया.