Maratha community Reservation
CM एकनाथ शिंदे और मनोज जरांगे

Loading

जालना: मराठा प्रदर्शनकारी मनोज जारांगे-पाटिल (Manoj Jarange Patil ) ने शुक्रवार को चुनौती  देते हुए कहा कि अगर 4 दिसंबर तक मराठा समुदाय को आरक्षण (Maratha Reservation ) नहीं दिया गया तो शिंदे सरकार (Maharashtra Government) को मुश्किल का सामना करना पद सकता है। जलना में एक बैठक में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने 24 दिसंबर तक महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को आरक्षण देने का वादा किया है। 24 दिसंबर तक मराठा समुदाय को आरक्षण दिया जाए। नहीं तो सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर हमारे साथ अन्याय होता रहा तो हमें सोचना होगा कि हम कब तक संयम और धैर्य रखेंगे। 

हमने इतनी क्रूर सरकार नहीं देखी

जालना में हुए लाठीचार्ज पर बोलते हुए मनोज जरांगे ने कहा कि जब हम शांतिपूर्वक विरोध कर रहे थे, तो हमारी मां-बहनों पर हमला किया गया, उनका खून बहाया गया। हमने इतनी क्रूर सरकार कभी नहीं देखी। उन्होंने कहा कि एक तरफ आप कहते हैं कि आप दर्ज केस वापस ले लेंगे। लेकिन दूसरी ओर, आप हमारे लोगों को गिरफ्तार करते हैं।

हम लातूर में करेंगे कार्यक्रम 

उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज के तीन महीने के बाद, हमारे लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने सवाल पूछा कि लातूर में क्या हुआ, उस जगह पर कर्फ्यू क्यों लगा दिया गया। जरांगे ने यह भी कहा कि हम लातूर में कार्यक्रम करेंगे। अगर भविष्य में हमारे लोगों के साथ अन्याय तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर यह सब एक व्यक्ति के दबाव के कारण हो रहा है, तो हम इसे भी बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

“5 करोड़ मराठा जेल जाने से नहीं डरते”

जारांगे-पाटिल ने आगे कहा कि हम यह नहीं भूलेंगे कि पुलिस अधीक्षक और पुलिस ने हम पर हमला किया था। ऐसी साजिश दोबारा मत करिए।  उन्होंने कहा कि पहले पुलिस अधीक्षक को पदोन्नत किया गया। क्या हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर दूसरे अधीक्षक के पद पर पदोन्नत किया जाएगा? लेकिन, हम 5 करोड़ मराठों के जेल जाने से नहीं डरते।” 

“OBC को नेता मानने वाले दूसरों के साथ कर रहे हैं अन्याय”

मनोज जारांगे-पाटिल ने छगन भुजबल की आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग खुद को ओबीसी को नेता मानते हैं वे दूसरों (OBC) के साथ अन्याय कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “उन्होंने (छगन भुजबल) अन्य ओबीसी जातियों के साथ भी अन्याय किया है।  उन्होंने 2009 और 2014 के बीच, ओबीसी महामंडल के 80 प्रतिशत जगह का उपभोग किया और 20 प्रतिशत शेष 300 जातियों को दिया गया।”