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    नागपुर. महानगरपालिकाओं में अगले वर्ष की शुरुआत में ही होने जा रहे आम चुनावों के लिए कुछ समय पहले वार्ड पद्धति से चुनाव होने की घोषणा से तमाम राजनीतिक दलों के माथे पर बागियों को लेकर बल पड़ गए थे. किंतु अब बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मुंबई छोड़कर अन्य महानगरपालिकाओं में बहुसदस्यीय प्रभाग पद्धति से चुनाव लेने का निर्णय लिया गया. यहां तक कि 3 सदस्यीय प्रभाग पद्धति से चुनाव होने पर भी मुहर लगने की जानकारी सूत्रों ने दी.

    सूत्रों के अनुसार इस संदर्भ में जल्द ही अध्यादेश भी जारी किया जाएगा. मंत्रिमंडल की ओर से 3 सदस्यीय प्रभाग पद्धति से आगामी चुनाव होने का निर्णय लेने से अब न केवल कांग्रेस बल्कि इस पद्धति का पहले भी अनुभव होने से भाजपा के लिए भी लॉटरी लगने जानकारी सूत्रों ने दी. बहुसदस्यीय प्रभाग पद्धति होने से अब छुटभैये नेताओं की हवा निकल गई है. यहां तक निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों आशा पर भी पानी फिर गया है. 

    निर्दलीयों को लेकर पार्टियों की सिरदर्दी खत्म

    सूत्रों के अनुसार वार्ड पद्धति राजनीतिक दलों के अलावा निर्दलीय  चुनाव लड़ने वालों की संख्या भी अधिक होती है. पार्टी से नाराज कार्यकर्ता ही निर्दलीय के रूप में लड़ने से पार्टी को नुकसान होने के कई उदाहरण भी रहे हैं. यही कारण रहा कि इस तरह से सभी राजनीतिक दलों को इसका नुकसान होने के चलते बहुसदस्यीय प्रभाग पद्धति से चुनाव लड़ने पर सहमति जताई गई.

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार वर्ष 2002 में 3 सदस्यीय प्रभाग पद्धति के अनुसार महानगरपालिकाओं में चुनाव कराए गए थे जिसमें कांग्रेस, राकां और शिवसेना को भी काफी लाभ हुआ था जबकि 4 सदस्यीय प्रभाग पद्धति में इन तीनों दलों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था. इसके मद्देनजर अब 3 सदस्यीय पद्धति पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया है. 

    2002 में इस तरह जीते थे राजनीतिक दल

    • 134 सदस्य संख्या नागपुर महानगरपालिका में.
    • 51 सदस्य कांग्रेस से जीते थे.
    • 47 पर भाजपा ने मारी थी बाजी.
    • 9 सीटों पर एनसीपी ने भी लहराया था झंडा.
    • 9 सीटें बसपा के खाते में भी थीं.
    • 6 सीटों पर जीते थे सेना प्रत्याशी.
    • 12 निर्दलीयों ने भी दर्ज की थी जीत.

    सदस्य संख्या बढ़ाने पर फिलहाल निर्णय नहीं

    • सूत्रों के अनुसार बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में बहुसदस्यीय प्रभाग पद्धति से चुनाव कराने का निर्णय तो लिया गया किंतु सदस्यों की संख्या बढ़ाने को लेकर किसी तरह की चर्चा नहीं की गई है जिससे सदस्य संख्या बढ़ाने पर फिलहाल निर्णय नहीं हो पाया है. 
    • जानकारों के अनुसार प्रत्येक महानगरपालिकाओं में जनसंख्या और महानगरपालिकाओं का दायरा बढ़ चुका है. यहां तक कि दायरा बढ़ने से मतदाताओं की संख्या भी बढ़ गई है जिससे निश्चित ही सदस्य संख्या बढ़ाने की जरूरत होगी. 
    • हाल ही में चुनाव आयोग की ओर से वर्ष 2011 की जनसंख्या के आधार पर वार्ड रचना के निर्देश जारी किए गए जिससे सदस्य संख्या कितनी होगी, इसे लेकर संभ्रम की स्थिति बनी हुई है. 

    सत्ता के लिए बढ़िया मौका

    राज्य सरकार की ओर से सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद बहुसदस्यीय प्रभाग पद्धति से चुनाव लेने का निर्णय लिया है. कांग्रेस के लिए महानगरपालिका में सत्ता पाने का यह बढ़िया मौका है. इसके पू्र्व कांग्रेस ने वर्ष 2002 में 3 सदस्यीय प्रभाग पद्धति से चुनाव लड़कर सत्ता स्थापित की थी. यदि वार्ड पद्धति होती तो संभवत: स्थानीय राजनीति के कारण कई अच्छे प्रत्याशी मनपा की सभा में नहीं पहुंच पाते. अब कांग्रेस की काफी सिरदर्दी खत्म हो गई है. -विकास ठाकरे, शहर अध्यक्ष, कांग्रेस. 

    भाजपा को नहीं पड़ता फर्क

    जिस दल के पास देवदुर्लभ और जमीनी स्तर पर के कार्यकर्ता हैं उन्हें किसी भी प्रभाग पद्धति से भय नहीं है. भले ही चुनाव वार्ड पद्धति या फिर 3 सदस्यीय पद्धति से होने जा रहे हों, भाजपा को किसी तरह का फर्क नहीं पड़ता है. इस बार फिर से जनता भाजपा की झोली में ही वोट डालेगी. किंतु वार्ड पद्धति के बदले प्रभाग पद्धति से चुनाव कराने का निर्णय लेने से महाविकास आघाड़ी की घबराहट उजागर हो गई है.-प्रवीण दटके, शहर अध्यक्ष, भाजपा.

    कांग्रेस-राकां की सत्ता तय

    बहुसदस्यीय प्रभाग पद्धति के लिए राज्य सरकार द्वारा उचित निर्णय लिया गया. सभी पहलुओं पर मंथन के बाद ही इस नतीजे पर महाविकास आघाड़ी पहुंची होगी. इसके पूर्व भी मनपा में 3 सदस्यीय पद्धति में कांग्रेस-राकां सत्ता में आई थी. इस बार भी महाविकास आघाड़ी की सत्ता निश्चित है. चुनाव में मतदाताओं के सामने भाजपा की पोल खोली जाएगी. -दुनेश्वर पेठे, शहर अध्यक्ष, राकां.

    मनपा में भी आघाड़ी की आशा

    राज्य में महाविकास आघाड़ी की सरकार है. महाविकास आघाड़ी के मंत्रियों ने मिलकर 3 सदस्यीय प्रभाग पद्धति से महानगरपालिकाओं में चुनाव लेने का निर्णय लिया है जिससे महानगरपालिकाओं में भी आघाड़ी हो, यही आशा है. भाजपा को धूल चटाने के लिए एकजुटता से कार्य करने की आवश्यकता है. यही कारण है कि बहुसदस्यीय प्रभाग पद्धति लागू की गई है.-दीपक कापसे, शहर अध्यक्ष, शिवसेना.