टूरिस्ट कैब से घटेगा वायु प्रदूषण, लोगों में बढ़ रहा है इलेक्ट्रिक वाहन का चलन

    नागपुर. पेट्रोल-डीजल के बढ़ते ग्राफ ने आम आदमी के साथ ही व्यवसाय करने वाले लोगों को संकट में डाल दिया है. इसका असर लोगों को लाने-ले जाने वाले वाहनों पर भी पड़ा है. बीते 3 वर्षों की बात करें तो शहर में ऑटोरिक्शा की रफ्तार थमती नजर आ रही है वहीं टूरिस्ट कैब बढ़ रही हैं. इसका सीधा कारण माइलेज से जुड़ा है. परिवहन के धंधे से जुड़े लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों में फायदे का सौदा दिख रहा है. यह हम नहीं नागपुर शहर एवं पूर्व आरटीओ के 3 वर्षों  के आंकड़े बताते हैं कि शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि रफ्तार बहुत धीमी है.

    पूरे शहर में अगर पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों की बात करें तो उसकी संख्या 15 लाख के ऊपर है. वहीं इसके मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या करीब 4,000 के आसपास है. रफ्तार धीमी ही सही लेकिन अब लोगों की समझ में आ रहा है कि परिवहन के धंधे में टिके रहना है तो परिवर्तन करना पड़ेगा. हालांकि कई लोग अभी भी परिवर्तन के लिए तैयार नहीं हैं. इलेक्ट्रिक वाहनों के संबंध में कई तरह की शंकाएं हैं जिन्हें हल करने की जरूरत है. फिलहाल शासन द्वारा इसकी जानकारी के लिए कोई अधीकृत प्लान न होने से इलेक्ट्रिक वाहन के फायदे लोगों को कम समझ में आ रहे हैं.

     कमाई से बढ़ रहा क्रेज  

    शहर में परिवहन से जुड़े अतीक खान का कहना है कि पहले वे ऑटोरिक्शा चलाते थे लेकिन उन्होंने एक वर्ष पहले टूरिस्ट कैब फाइनेंस के माध्यम से ली है. इसमें प्रदूषण सर्टिफिकेट का झंझट नहीं है. साथ ही कमाई में 30 प्रतिशत इजाफा भी हुआ है. बस चार्जिंग स्टेशन न होने के कारण थोड़ा टेंशन रहता है लेकिन वे अपनी मासिक किस्त के साथ परिवार का गुजारा आसानी से बिना किसी टेंशन कर रहे हैं. उनका कहना था कि ऑटो में सर्विस खर्च बहुत आता है. पेट्रोल महंगा होने से सवारियां भी ज्यादा पैसा देने में आनाकानी करती हैं इसलिए उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन की तरफ जाना ज्यादा उचित लगा.

     2030 तक है शासन का लक्ष्य 

    केन्द्र सरकार ने पूरे देश में इलेक्ट्रिक वाहन चलन में लाने के लिए वर्ष 2030 का लक्ष्य चुना है. इसके लिए कवायद भी तेज हो गई है. कई बड़ी कंपनियां भी बाजार में आ गई हैं. सरकार इन वाहनों पर सब्सिडी भी दे रही है. लेकिन जागरूकता की कमी की वजह से बाजार में इन वाहनों के चलन में आने की रफ्तार बेहद धीमी है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहन पूरी तरह से चलन में आ जाएंगे तो वायु प्रदूषण से कुछ हद तक राहत मिलेगी.