Devendra Fadnavis
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    नागपुर. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ 2014 में चुनावी हलफनामे में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का कथित रूप से खुलासा नहीं करने की शिकायत के संबंध में यहां की एक अदालत ने आरोप तय किए हैं. प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट वीएम देशमुख ने शनिवार को फडणवीस के खिलाफ आरोप तय किए लेकिन भाजपा नेता ने खुद को निर्दोष बताया है. कोर्ट अधिवक्ता सतीश उके द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामले का “खुलासा नहीं करने” पर फडणवीस के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है. अदालत ने इस मामले में 24 नवंबर को दोनों पक्षों को सुना था.

    CRPC की धारा 205 के तहत बनता है मामला

    अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया आरोपी (फडणवीस) के खिलाफ अपराध बनता है. उसने यह सुनवाई भी की कि क्या फडणवीस की मौजूदगी जरूरी है. फडणवीस ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 205 के तहत एक आवेदन दायर किया था और अदालत में व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी थी और एक शपथ-पत्र दिया था कि उनके वकील उदय दाबले मौजूद रहेंगे और उनकी ओर से आरोपों का जवाब देंगे. अदालत ने उनका आवेदन स्वीकर किया था. 

    फडणवीस ने बताया खुद को निर्दोष

    जब अदालत ने फडणवीस से पूछा कि क्या वह दोष मानते हैं, इस पर उनके वकील ने कहा कि वह दोषी नहीं हैं. अदालत ने फडणवीस को एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया कि वह आरोपों को ठीक से समझ चुके हैं और उनकी अनुपस्थिति में याचिका और विवरण दर्ज करने में कोई पूर्वाग्रह नहीं है और वह भविष्य में इस पर विवाद नहीं करेंगे. अदालत ने मामले में शिकायतकर्ता से भी गवाहों की नई सूची पेश करने को कहा. उके ने तर्क दिया है कि भाजपा नेता ने अपने खिलाफ 2 लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं करके 2014 में झूठा हलफनामा दायर किया था. फडणवीस के खिलाफ 1996 और 1998 में धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले दर्ज किए गए थे.