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    नागपुर. ओबीसी आरक्षण को लेकर राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए अध्यादेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई. याचिका पर सोमवार को सुनवाई के बाद न्यायालय ने इस अध्यादेश के अमल पर अस्थायी रोक लगा दी. ओबीसी आरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश जारी होते ही पूरे राज्य में सबसे बड़े मतदाता वाले ओबीसी समाज के हितैषी होने का दिखावा कर कांग्रेस और भाजपा में एक तरह से जंग छिड़ गई है. कांग्रेस ने इम्पीरिकल डेटा और जातिगत जनगणना के लिए जहां भाजपा की केंद्र सरकार को दोषी माना है, वहीं  राज्य में महाविकास आघाड़ी की लचर कार्यप्रणाली को लेकर भाजपा भी निशाना साध रही है. 

    ओबीसी के खिलाफ भाजपा का षड्यंत्र : पटोले

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि ओबीसी के खिलाफ भाजपा का षड्यंत्र दिखाई दे रहा है. महाविकास आघाड़ी ने अपने अधिकार से 50 प्रतिशत तक ओबीसी को आरक्षण देने का निर्णय लिया. इस पर राज्यपाल के हस्ताक्षरों से अध्यादेश निकाला गया. इस अध्यादेश को किसने सुको में चुनौती दी. यह देखना होगा. सुको में सुनवाई के समय प्रतिवादी के रूप में केवल चुनाव आयोग था. राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं मिला है, जबकि तुरंत प्रभाव से अध्यादेश पर अस्थायी रोक लगा दी गई. सुको में अपीलकर्ता की ओर से जिन बड़े-बड़े वकीलों ने पैरवी की, वही वकील भाजपा की ओर से अब तक न्यायिक लड़ाई लड़ते दिखाई देते रहे हैं. इससे ओबीसी को दिया गया आरक्षण रद्द कराने के लिए भी याचिकाकर्ता की पीछे भाजपा की शक्ति होने से इनकार नहीं किया जा सकता है. पटोले ने कहा कि इम्पीरिकल डेटा जमा करने के लिए राज्य ने आयोग तैयार किया. किंतु कोरोनाकाल के चलते डेटा तैयार नहीं हो पाया. इम्पीरिकल डेटा जमा करने के लिए जातिगत गणना करने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया. किंतु केंद्र के गृह मंत्री अमित शाह ने जातिगत गणना करने का विरोध किया ताकि ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण न मिल पाए. इसके पीछे भाजपा का षड्यंत्र है. 

    नेता बहा रहे घड़ियाली आंसू

    पटोले ने कहा कि एक ओर ओबीसी को आरक्षण उपलब्ध कराने में अड़ंगा डालना और दूसरी ओर अब सड़कों पर लड़ाई लड़ने की बात करना, एक तरह से घड़ियाली आंसू बहाने जैसा है. जिला परिषद के चुनाव के पूर्व भी ओबीसी आरक्षण का मुद्दा बनाकर इसी तरह के आंदोलन भाजपा की ओर से किए गए. पढ़े-लिखे ओबीसी समाज को समझ गया है कि इसके पीछे कौन है. यही कारण है कि जिला परिषद के चुनाव में सूपड़ा साफ हो गया है. इस परिणाम के बाद भी नहीं सुधरे तो भविष्य के चुनावों में फिर इनको मुंह की खानी पड़ेगी. भाजपा की इन कारगुजारियों को जनता के सामने उजागर किया जाएगा. इनका असली चेहरा जनता को दिखाया जाएगा. 

    एक माह में दें आरक्षण अन्यथा आंदोलन : बावनकुले

    भाजपा के प्रदेश महासचिव चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि राज्य की महाविकास आघाड़ी ओबीसी को आरक्षण नहीं देना चाहती है. यही कारण है कि ओबीसी आरक्षण लटकता जा रहा है. लचर कार्यप्रणाली के कारण ही सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगाई है. यदि महाविकास आघाड़ी एक माह के भीतर इम्पीरिकल डेटा जमा कर आरक्षण नहीं देती है और ओबीसी आरक्षण के बिना ही चुनाव होते हैं तो भाजपा सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी. महाविकास आघाड़ी के मंत्रियों का घूमना बंद कर देंगे. उन्होंने कहा कि इम्पीरिकल डेटा नहीं देने से ही ओबीसी का राजनीतिक आरक्षण रद्द किया गया जिससे राज्य सरकार ने पुन: 50 प्रतिशत आरक्षण का अध्यादेश जारी किया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आयोग तैयार किया किंतु उसे कामकाज के लिए निधि ही उपलब्ध नहीं कराई गई है. केवल एक माह के भीतर डेटा तैयार किया जा सकता है, जबकि महाविकास आघाड़ी सरकार को 10 माह का समय मिला. ओबीसी आरक्षण के बिना कोई भी चुनाव नहीं कराने की मांग भी उन्होंने की.