maharahstra assembly winter session 2023

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नागपुर. सिटी में औचक बारिश के कारण मौसम भले ही ठंडा हो गया हो लेकिन 7 दिसंबर से शुरू होने जा रहे विधानमंडल के शीत सत्र को लेकर अब गरमाहट बढ़ने लगी है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जहां विधानभवन की सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों ने मोर्चा संभाल लिया वहीं सत्र के दौरान सदन के भीतर होने वाली कार्यवाही के लिए गुरुवार से ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्वीकारने की प्रक्रिया भी शुरू होने जा रही है.

उल्लेखनीय है कि गत कुछ दिनों से शीत सत्र 11 दिसंबर से शुरू होने की अटकलें लगाई जा रही थीं. किंतु बुधवार को मुंबई में हुई कामकाज सलाहकार समिति की बैठक में अब 7 दिसंबर से शीत सत्र होने पर मुहर लग जाने के कारण अटकलों पर विराम लग गया है. विशेषत: अब शीत सत्र के लिए विधानमंडल के कामकाज में काफी गति आ गई है. विधानमंडल के सचिव, उपसचिव और अन्य अधिकारियों ने भी कार्य शुरू कर दिया है.

तारांकित प्रश्नों की भरमार

बताया जाता है कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भले ही गुरुवार से स्वीकार होने जा रहे हों लेकिन प्रश्नोत्तरकाल के लिए विधायकों द्वारा पहले से ही तारांकित प्रश्न तैयार किए गए हैं. यही कारण है कि विधान परिषद में आने वाले प्रश्नों की सूची में अब तक 1,800 प्रश्न भेजे जाने की जानकारी सूत्रों ने दी. बताया जाता है कि विधान परिषद के साथ ही विधानसभा के लिए भी भारी संख्या में विधायकों के प्रश्न आने की संभावना जताई जा रही है. अपने विधानसभा क्षेत्रों को न्याय दिलाने के लिए विधायकों की ओर से सदन में प्रश्न उपस्थित किए जाते हैं. 

3 सप्ताह का होगा कामकाज

जानकारी के अनुसार शीत सत्र के दौरान विधानमंडल के दोनों सदनों में महत्वपूर्ण विधेयक भी रखे जाएंगे. विधानमंडल की बैठकों के लिए प्रस्तावित अस्थायी दिनदर्शिका तैयार हुई है जिसके अनुसार 3 सप्ताह का कामकाज प्रस्तावित किया गया है. इसमें अवकाश के साथ ही कुल 14 दिन होंगे, जबकि प्रत्यक्ष कामकाज 10 दिन का होगा. पहले सप्ताह 7 दिसंबर को सत्र के पहले दिन सदन में अध्यादेश रखे जाएंगे. इसी तरह से वर्ष 2023-24 की पूरक मांगों को भी रखा जाएगा.

सरकारी कामकाज व शोक प्रस्ताव भी होगा. 8 दिसंबर को शासकीय व अशासकीय प्रस्ताव रखे जाएंगे. इसके बाद 2 दिन अवकाश होगा. दूसरे सप्ताह के पहले दिन 11 दिसंबर को शासकीय व अशासकीय कामकाज होगा. 12 दिसबंर को पूरक विनियोजन विधेयक के साथ सत्तापक्ष का प्रस्ताव होगा, जबकि गुरुवार को विपक्ष का प्रस्ताव होगा. शुक्रवार को शासकीय व अशासकीय विधेयक रखे जाएंगे. तीसरे सप्ताह में केवल 3 दिन का कामकाज होगा. तीसरे सप्ताह के मंगलवार को अंतिम सप्ताह प्रस्ताव रखा जाएगा. अंत में शासकीय कामकाज से सत्रावसान होगा.