Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation

    पिंपरी : मनमानी (Arbitrary) और आपराधिक (Criminal) कृत्यों (Acts) में सहभागिता (Participation) पाए जाने से पिंपरी चिंचवड (Pimpri Chinchwad) महानगरपालिका (Municipal Corporation) प्रशासन (Administration) में चिंचवड ऑटोक्लस्टर स्थित कोविड केयर सेंटर चलाने का स्पर्श अस्पताल का ठेका रद्द कर दिया। हालांकि इसके बाद भी उसके द्वारा सुरक्षा के लिए नियुक्त किये गए बाउंसरों की सेवा महानगरपालिका ने अधिग्रहित की थी। इन 2 बाउंसरों के 22 दिन के मानदेय के लिए 2 लाख 36 हजार रुपए अदा किए जाएंगे। महानगरपालिका की स्थायी समिति की साप्ताहिक बैठक में इसके प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

    कोरोना संक्रमण की शुरुआत के बाद 28 अगस्त 2020 से चिंचवड़ ऑटोक्लस्टर स्थित कोरोना केयर सेंटर स्पर्श अस्पताल को सौंप दिया गया। हालांकि, बाद में यह पता चला कि स्पर्श अस्पताल अपराधिक गतिविधियों में शामिल था, जिसमें वेंटिलेटर बेड के लिए पैसे की मांग करना और काला बाजारी पर उपचारात्मक इंजेक्शन बेचना। इसके चलते महानगरपालिका कमिश्नर राजेश पाटिल ने 9 मई 2021 को स्पर्श अस्पताल चलाने वाले ऑटोक्लस्टर कोरोना अस्पताल का तुरंत अधिग्रहण करने का निर्णय लिया। स्पर्श अस्पताल का अनुबंध रद्द कर दिया गया था।

    20 बाउंसरों की सेवाएं अधिग्रहित की गई

    हालांकि स्पर्श अस्पताल और अन्य संस्थानों के चिकित्सा अधिकारी, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य स्टाफ समेत 20 बाउंसरों की सेवाएं अधिग्रहित की गई। महानगरपालिका कमिश्नर के आदेश में उल्लेख किया गया कि इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अस्पताल द्वारा अर्जित अवधि के नियमानुसार देय वेतन भत्तों का भुगतान महानगरपालिका के माध्यम से किया जायेगा। जैसे-जैसे कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर घटने लगी, वैसे-वैसे अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या भी कम होती गई।

    2 लाख 36 हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा

    ऑटोक्लस्टर अस्पताल में मरीज नहीं होने के कारण अस्पताल को 31 मई से बंद करने की मंजूरी दी गई। नतीजा यह रहा कि अस्पताल के लिए अधिग्रहीत स्पर्श अस्पताल के 20 बाउंसर निकाल दिए गए। इन 20 बाउंसरों को 10 मई से 31 मई 2021 तक 22 दिनों की अवधि के लिए मानदेय का भुगतान करना होगा। ऑटोक्लस्टर अस्पताल के नोडल अधिकारी द्वारा 20 अगस्त को बाउंसर की हाजिरी रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज जमा कराए गए है। इसके अनुसार 20 बाउंसरों को न्यूनतम मजदूरी दर के रूप में 2 लाख 36 हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा। स्थायी समिति ने इसे मंजूरी दे दी।