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  • गांधी-विनोबा की भूमि होने के बावजूद सरकार उदासीन

वर्धा. राज्य सरकार ने मैग्नेटिक महाराष्ट्र 2.0 के तहत राज्य में देशी और विदेशी कंपनियों का 61 हजार करोड़ का निवेश किया है. वहीं सरकार ने महात्मा गांधी की कर्मभूमि को दरकिनार कर दिया है. जिले में उद्योगों के लिए सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होने के उपरांत भी किसी भी कंपनी का निवेश नहीं हो रहा है. महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में जिले के विकास का वनवास खत्म नहीं हो रहा है.

महात्मा गांधी के नाम से जिले को देश व विदेश में पहचाना जाता है. बावजूद इसके जिले की निरंतर उपेक्षा होती आयी है. उद्योगों के दृष्टिकोण से आज भी जिला पिछड़ा है. उद्योग नहीं से युवाओं को रोजगार की तलाश में मुंबई, पुणे के साथ अन्य जगह जाना पड़ रहा है. जिले में उद्योग स्थापित करने की मांग गत अनेक वर्षों से जारी है.

बीते 4 दशक में एक भी बड़ा उद्योग जिले में शुरू नहीं हुआ है. चार वर्ष पूर्व सिंदी रेलवे में भाजपा नेताओं ने बाजे गाजे के साथ जेएनपीटी ड्रायपोर्ट की नींव रखी. यह प्राजेक्ट जल्द शुरू कराकर स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही. अब तक प्रोजेक्ट प्रारंभ नहीं हो सका, जिसका काम कछुआ गति से चल रहा है. राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद महाविकास आघाड़ी सत्ता में आयी है. नई सरकार के कार्यकाल में जिले का उद्योग के संदर्भ का वनवास खत्म होने की आशाएं जगी थी, लेकिन यह भी धूमिल हो गई.

अमरावती छोड़ विदर्भ हाशिए पर

मंगलवार को मुख्यमंत्री ठाकरे ने राज्य में 61 हजार 42 करोड़ रुपए का निवेश होने की जानकारी देकर 2 लाख 53 हजार 880 को रोजगार मिलने की बात कही है. किंतु अमरावती छोड़ विदर्भ के अन्य जिले में एक भी उद्योग स्थापित करने में सरकार ने रूची नहीं दिखाई है. अनेक उद्योग कोंकण, पुणे व मराठवाड़ा में लगाने की घोषणा करते हुए सरकार ने पुन: एक बार विदर्भ के साथ अन्याय किया है.

सुविधाओं की भरमार

जिले से समृद्धि महामार्ग के साथ राष्ट्रीय महामार्ग 6, 7 व 341 गया है. साथ देश के किसी भी कोने में जाने के लिये रेल सेवा उपलब्ध है. अनेक बड़े बांध होने के कारण पानी की सुविधा के साथ जमीन उपलब्ध है. मजदूर के साथ पढ़े लिखे नौजवानों की बड़ी फौज जिले में है, जिससे जिले में उद्योग स्थापित किया जा सकता है. सभी सुविधा होने के बावजूद सरकार की अनदेखी से कोई बड़ा प्रोजेक्ट जिले में नहीं आया है. इसके चलते स्थानीय नेताओं के साथ युवाओं ने नाराजगी है.

गांधी भूमि के साथ अन्याय

गांधी–विनोबा का जिला होने के बावजूद भी मुख्यमंत्री ने जिले के साथ सौतेला व्यवहार किया है. राज्य में बड़ा निवेश होने के कारण जिले में एखाद बड़ा उद्योग स्थापित होना चाहिए था. किंतु जिले में 4 में से 3 विधायक भाजपा के होने के कारण विकास से दूर रखने का बीड़ा सरकार ने उठाया है.

-दादाराव केचे, विधायक-आर्वी.

पालकमंत्री से करेंगे मांग

जिले में उद्योग स्थापित होना आवश्यक है. जिले में सभी सुविधाएं उपलब्ध होने के साथ ही पढ़े लिखे युवाओं की संख्या बड़ी है. उन्हें रोजगार मिले व जिले में नये उद्योग स्थापित करने के संदर्भ में पालकमंत्री सुनील केदार से मांग की जायेगी.

-शेखर शेंडे, नेता-कांग्रेस.

सरकार को केवल एक वर्ष हुआ है. भविष्य में राज्य में निवेश के अनेक अवसर है. मुख्यमंत्री ठाकरे विदर्भ के साथ अन्याय नहीं करेंगे. जिले में सभी सुविधा होने के कारण उद्योग स्थापित हो, इसके लिये मुख्यमंत्री व उद्योग मंत्री से चर्चा की जाएगी.

-अशोक शिंदे, पूर्व उद्योग राज्यमंत्री-सेना नेता.

सब को समान न्याय देना जरूरी

राज्य में उद्योग स्थापित करते समय सभी प्रांतों को समान न्याय देना जरूरी है. विदर्भ उद्योग क्षेत्र में पिछड़ा है. वहां उद्योग स्थापित होने चाहिए. खेती से जुड़े उद्योगों को सरकार ने प्राथमिकता देनी चाहिए. इस संदर्भ में वरिष्ठों से चर्चा की जाएगी.

-राजू तिमांडे,पूर्व विधायक-राकां नेता.