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    -ओमप्रकाश मिश्र

    रांची: रांची (Ranchi) स्थित प्रोजेक्ट भवन में आयोजित कार्यक्रम में एसआरएमआई (Safe Responsible Migration Initiative) योजना के लॉन्च के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन (Chief Minister Hemant Soren) ने राज्य भर से दूसरे राज्यों और विदेशों तक काम की तलाश में जाने वाले श्रमिकों (Workers) के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि कोरोना काल के दौरान प्रवासी श्रमिकों के साथ देशभर में हुई त्रासदी को देखते हुए राज्य सरकार इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत है। साथ ही प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए इस योजना की शुरुआत की जा रही है। हमारा प्रयास है कि अगर हमारे राज्य का श्रमिक या कोई भी कामगार कमाने के लिए राज्य से बाहर किसी भी स्थान पर जाता है , तो वह निर्भीक एवं सुरक्षित महसूस करें कि उनके राज्य की सरकार किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान में उनके साथ है।

    इस योजना की शुरुआत से पहले और योजना की शुरुआत के बाद भी ऐसे कई मौके आए जब राज्य के बाहर किसी विपरीत परिस्थिति में फंसे श्रमिकों ने राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई और मुख्यमंत्री ने उन मामलों में पूरी संवेदनशीलता दिखाते हुए श्रमिकों की सकुशल घर वापसी की व्यवस्था सुनिश्चित की।

    अफ्रीकी देश माली में फंसे 33 मजदूरों ने लगाई थी देश वापसी की गुहार

    मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, विगत 16 जनवरी को मुख्यमंत्री को जानकारी मिली कि अफ्रीकी देश माली में गिरिडीह और हजारीबाग जिले के 33 प्रवासी श्रमिक फंसे हुए हैं और उन्हें उनके काम का मेहनताना भी नहीं दिया जा रहा है। तीन महीने से अधिक वक्त बीत जाने के बाद भी कंपनी द्वारा प्रवासी श्रमिकों को वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है।

    श्रमिकों के लिए हर संभव मदद की करें व्यवस्था

    इस मामले पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मंत्री श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विभाग, सत्यानंद भोक्ता को मामले में त्वरित कार्रवाई कर श्रमिकों तक हर संभव मदद पहुंचाने का निर्देश दिया। जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने ट्वीटर के जरिए ही मजदूरों का संपर्क सूत्र पता कर लेबर कमिश्नर, झारखंड सरकार को माली स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क करने का निर्देश दिया।

    श्रम आयुक्त ने माली स्थित भारतीय दूतावास में राजनयिक को लिखा पत्र

    मजदूरों से तत्काल संपर्क स्थापित कर और उनसे उनकी समस्या की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के उपरांत लेबर कमिश्नर, ए. मुथूकुमार ने माली स्थित भारतीय दूतावास के राजनयिक अंजनी कुमार से संपर्क कर मजदूरों की समस्या के समाधान का आग्रह किया। अफ्रीकी देश माली के बमाको स्थित भारतीय दूतावास ने राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी पर संज्ञान लिया। तत्पश्चात दूतावास ने मजदूरों एवं कंपनी से संपर्क स्थापित किया। दोनों ही पक्षों को मामले के समाधान के लिए 18 जनवरी को बैठक के लिए आमंत्रित किया गया। 

    बकाया वेतन और रांची तक की फ्लाइट टिकट की व्यवस्था 

    भारतीय दूतावास की मध्यस्थता में आयोजित बैठक के दौरान कंपनी के अधिकारियों ने मजदूरों का बकाया वेतन भुगतान करने और सभी 33 मजदूरों के माली से रांची तक की फ्लाइट टिकट की व्यवस्था करने की जिम्मेवारी ली। साथ ही फ्लाइट मिलने तक ये सभी मजदूर श्रमिक जब तक माली में रहेंगे, उनके रहने, खाने एवं किसी भी प्रकार की आपात व्यवस्था के लिए कंपनी जिम्मेदार होगी। इस मध्यस्थता पत्र पर श्रमिकों की तरफ से एक प्रतिनिधि एवं कंपनी की ओर से एक प्रतिनिधि ने हस्ताक्षर किया। साथ ही भारतीय दूतावास के दो उच्च अधिकारियों ने इस पर सहमति जताई। दूतावास ने कंपनी को मजदूरों से नो ड्यूज सर्टिफिकेट प्राप्त कर उनकी घर वापसी की व्यवस्था पूरी कर सूचित करने का निर्देश भी दिया है।