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  • सांसद तडस ने की प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपए की मांग

वर्धा. सोयाबीन उत्पादक किसानों का मुद्दा सांसद रामदास तडन से नियम 377 अंतर्गत लोकसभा में किसानों को प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये मदत देने की मांग कर सभी का ध्यान केन्द्रीत किया.

खेत में होनेवाली फसल ही किसानों के उदरनिर्वाह का साधन होता है. महाराष्ट्र में कपास के बाद सबसे अधिक सोयाबीन की बुआई की जाती है. इस वर्ष भी सोयाबीन की बुआई की गई. शुरुआत में फर्जी बिज के कारण फसल ही नही उगी. फिर से बुआई करने पर विविध कीटकों का प्रादुर्भाव हुआ. जिससे किसानों का नुकसान होकर बुआई का खर्च निकलना भी मुश्किल है. कोविड-19, फर्जी बीज, कीटकों का प्रादुर्भाव ऐसे त्रिशंकू संकट से किसान घिर गया है. संकट में फंसे सोयाबीन उत्पादक किसानों को अभी तक राज्य सरकार ने कोई भी मदद नही की. किसानों की समस्या ध्यान में लेकर शीघ्र मदद मिले, इस दृष्टिकोण से सांसद रामदास तडस ने अतारांकित प्रश्न उपस्थित कर किसानों को हेक्टेयर 50 हजार रुपए मदद देने की मांग की.

सांसद तडस के प्रश्न को केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्यान मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जवाब देते हुए कहा कि, राज्य की रिपोर्ट के तहत गत वर्ष की तुलना में वर्ष 2020-21 में 1104.54 लाख हेक्टेयर पर खरीफ फसल की बुआई की गई है. भारत सरकार ने न्यूनतम सोयाबीन का समर्थन मूल्य बढाकर 3880 रुपए निर्धारित किया है. प्रादुर्भाव से 162147 हेक्टेयर सोयाबीन क्षेत्र प्रभावित हुआ है. जिसमें 8 जिलों का समावेश होकर वर्धा जिले में 43145 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित है. किसानों को मदद दिलाने राज्य सरकार आपदा निवारण निधि अंतर्गत निधि उपलब्ध किया गया है. जिसका इस्तेमाल राज्य सरकार मदद देने के लिए कर सकती है. साथ ही 2016 से केन्द्र सरकार ने पीएम बीमा योजना शुरु की है, इससे भी किसानों को लाभ मिलने की जानकारी दी.