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    अमेरिका: भारतीय सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त कर्मियों के महत्व को स्वीकार करते हुए यहां भारतीय दूतावास ने सोमवार को अमेरिका में रह रहे पूर्व सैनिकों को सम्मानित करने के लिए ‘वरिष्ठ योद्धा’ कार्यक्रम का आयोजन किया। विभिन्न युद्धों को लड़ चुके कुछ विशिष्ट पूर्व सैनिकों और परिवारों के सदस्यों सहित 140 से अधिक लोगों ने यहां इस कार्यक्रम में भाग लिया। अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने कहा, ‘‘दोस्तों, आपने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए निस्वार्थ भाव से भारत माता की सेवा और बलिदान किया है। आप और आपके परिवार के सदस्य 40 लाख भारतीय समुदाय के हिस्से के रूप में भारत-अमेरिका संबंधों को विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    उन्होंने भूतपूर्व सैन्यकर्मियों की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘कोई भी मान्यता और पुरस्कार आपके योगदान के साथ न्याय नहीं कर सकता है, आज का कार्यक्रम आपके प्रति हमारा सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का छोटा सा तरीका है और आपको यह भी बताना है कि हम यहां आपके लिए हैं।” संधू ने कहा, ‘‘इस विशेष सभा का हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व और सम्मान की बात है।” उन्होंने कहा कि यहां ऐसे लोग हैं, जिन्होंने 1948, 1962, 1965 या 1971, 1985, 1999 में करगिल युद्ध और कई अन्य अभियानों में भारत के लिए लड़ाई लड़ी है।

    राजदूत ने कहा, ‘‘आज का वरिष्ठ योद्धा कार्यक्रम हमारे पूर्व सैनिकों के बलिदान और सेवा को मान्यता देने और उन्हें देशभक्ति, समर्पण, देशसेवा और बलिदान करने की इच्छा के लिए सम्मानित करने का हमारा विनम्र प्रयास है।” उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने वरिष्ठ सैन्यकर्मियों की उसी तरह देखभाल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जैसे उन्होंने हमारे देश की सुरक्षा का ख्याल रखा है।” संधू ने कहा कि भारतीय पूर्व सैनिक, जहां भी जाते हैं, कर्तव्य, अनुशासन और पेशेवर रवैये के उच्चतम मानकों को निभाते हैं, जिसके लिए भारतीय सशस्त्र बलों को जाना जाता है।

    उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका में रहने वाले हमारे पूर्व सैनिक हमारे सशस्त्र बलों की परंपराओं के ध्वजवाहक बने हुए हैं और भारतीय समुदाय को प्रेरित करना जारी रखे हैं।” उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी उनकी बुद्धिमत्ता, कड़ी मेहनत और उच्च नैतिक मूल्यों से समृद्ध है। संधू ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका और भारत के बीच रक्षा साझेदारी ने दोनों देशों के बीच कई तरह के समझौतों को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो रक्षा प्रौद्योगिकी साझा करने और समुद्री सुरक्षा और ‘काउंटर-पाइरेसी’ में सहयोग से संबंधित हैं। भारत को अमेरिका ने ‘प्रमुख रक्षा भागीदार’ के रूप में नामित किया है और वह किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ अधिक सैन्य अभ्यास करता है।

    संधू ने बताया कि वर्तमान में, एक भारतीय नौसैनिक दल, जिसमें एक नौसैनिक जहाज भी शामिल है, रिमपैक नौसेना अभ्यास में भाग लेने के लिए हवाई में है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने अमेरिका से 20 अरब डॉलर से अधिक के रक्षा संबंधी अधिग्रहण किए हैं।

    भारतीय दूत ने कहा, ‘‘आज, भारतीय सेना अमेरिकी रक्षा मंचों का संचालन कर रही है, जिसमें परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर, हॉवित्जर, जहाज और कई अन्य हल्के उपकरण शामिल हैं, जिनमें से कई को पूरी तरह से परिचालन और मानवीय उपयोगों में तैनात किया गया है, जिसमें कोविड-19 महामारी के दौरान सहायता और चिकित्सा आपूर्ति परिवहन प्रदान करना शामिल है।उन्होंने कहा, ‘‘‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत हम अपने तुलनात्मक लाभों और रक्षा औद्योगिक सहयोग के अवसर लाभ उठाते हुए विशेष रूप से भारत और दुनिया के लिए नवाचार, सह-विकास और सह-उत्पादन करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।(एजेंसी)