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    नयी दिल्ली. नागर विमानन मंत्रालय (ministry of civil aviation) ने शुक्रवार को कहा कि भारत आने-जाने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें (International Flights) 15 दिसंबर से सामान्य रूप से संचालित होंगी। गौरतलब है कि भारत आने-जाने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कोविड-19 महामारी (COVID-19 Pandemic) के कारण 23 मार्च, 2020 से ही बंद हैं। हालांकि, पिछले साल जुलाई से करीब 28 देशों के साथ हुए एयर बबल समझौते के तहत विशेष अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानें संचालित हो रही हैं। नागर विमानन मंत्रालय ने विमानन नियामक डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) को पत्र लिखकर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन फिर से शुरू करने के लिए ‘आवश्यक कार्रवाई करने” को कहा है।

    नागर विमानन मंत्रालय ने एक आदेश में कहा, “भारत आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक यात्री उड़ानों को फिर से शुरू करने के संबंध में फैसला गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सलाह से लिया गया है। सभी ने मिलकर भारत से आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों को 15 दिसंबर से फिर से शुरू करने का निर्णय किया है।”

    मंत्रालय ने कहा, “व्यावसायिक अंतरराष्ट्रीय यात्री सेवाओं की पुन:बहाली द्विपक्षीय रूप से क्षमता के संबंध में हुए समझौतों की समीक्षा और एयर बबल समझौते का समापन होगा।”

    अगर कोई देश दूसरे देश के लिए व्यावसायिक उड़ान सेवा शुरू करना चाहता है तो यह तय करने के लिए कितनी विमानन कंपनियां, प्रवेश पोर्ट और कुल उड़ानों (या सीटों) को प्रति सप्ताह दोनों देशों के बीच अनुमति दी जाएगी एक द्विपक्षीय वायु सेवा समझौता करना होगा। डीजीसीए ने नागर विमानन मंत्रालय का पत्र प्राप्त होने के बाद सामान्य रूप से अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाओं की बहाली के संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

    मंत्रालय ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने जिन देशों को कोविड-19 के लिए ‘बिना खतरे वाला’ चिन्हित किया है, उन्हें “द्विपक्षीय वायु सेना समझौते के तहत पूर्ण क्षमता दी जाएगी।”

    शुक्रवार को जारी परिपत्र (सर्कुलर) में स्वास्थ्य मंत्रालय ने ब्रिटेन सहित यूरोप, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मॉरीशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाबवे, सिंगापुर, हांगकांग और इजराइल को ‘खतरे वाले’ देशों की सूची में रखा है।

    मंत्रालय ने कहा कि अगर किसी देश को कोविड-19 के लिए ‘खतरे’ वाली सूची में रखा गया है और उसका भारत के साथ एयर बबल समझौता है तो “महामारी से पहले के मुकाबले 75 प्रतिशत क्षमता के साथ उसे भारतीय या विदेशी विमानन कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भरने की अनुमति होगी, या फिर उपलब्धता के आधार पर उसे न्यूनतम सप्ताह में सात उड़ानों की अनुमति होगी।”

    वहीं, जिन देशों को ‘खतरे’ की सूची में रखा गया है और उनका भारत के साथ कोई एयर बबल समझौता नहीं है तो “उन्हें महामारी से पहले के मुकाबले 50 प्रतिशत क्षमता के साथ उसे भारतीय या विदेशी विमानन कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भरने की अनुमति होगी।” (एजेंसी)