Couldn't even imagine dreaming the Bollywood dream lyricist-writer Puneet Sharma

गीतकार-कवि पुनीत शर्मा कहना है कि उनका साहित्य और सिनेमा से कोई संबंध नहीं था। वह एक या दो कविताएँ लिख सकते थे, लेकिन कभी भी काम के लिए मुंबई के फिल्म उद्योग में जाने का सपना नहीं देखा था।

नयी दिल्ली. गीतकार-कवि पुनीत शर्मा कहना है कि उनका साहित्य और सिनेमा से कोई संबंध नहीं था। वह एक या दो कविताएँ लिख सकते थे, लेकिन कभी भी काम के लिए मुंबई के फिल्म उद्योग में जाने का सपना नहीं देखा था। लेखक ने हाल ही में अपनी धमाकेदार कविता ‘‘तुम कौन हो बे?” के साथ ढेर सारी प्रशंसा बटोरी थी और लोकप्रियता हासिल की, जिसे उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में पेश किया था। मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाले शर्मा ने विज्ञान की पढ़ाई पूरी करने के बाद यह रास्ता चुना।

इंदौर के रहने वाले शर्मा ने एक साक्षात्कार में पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘मैं सिर्फ अपनी खुशी या मजे के लिए लिखता था, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इसे एक करियर बनाऊंगा। मैंने विज्ञान को एक विषय के रूप में लिया। मुझे कॉलेज में बायोटेक्नोलॉजी में बीएससी करने के लिए भी प्रशंसा भी मिली।”

उन्होंने कहा, ‘‘बॉलीवुड में जाने का विचार दूर-दूर तक नहीं था यहां तक कि मुंबई जाने का सपना तक नहीं देख पाया था।” 2008 में, उन्हें एक रेडियो चैनल में नौकरी मिल गई और उसमें काम करने के दौरान उन्होंने मुंबई जाने का फैसला किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने रेडियो में अपने तीन वर्षों में बहुत कुछ सीखा और जाना। मैंने थिएटर किया, नाटक लिखे और गीत लिखे। तब मुझे एहसास हुआ कि अगर मुझे कई लोगों तक पहुंचना है और पैसा कमाना है, तो मुझे फिल्मों में जाना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं उद्योग के तकनीकी ज्ञान को इतना जानना और प्रशिक्षित होना चाहता था कि कोई भी यह नहीं कह सके कि आप यह नहीं जानते कि यह कैसे करना है।” गीतकार शर्मा ने ‘‘औरंगज़ेब”, ‘‘रिवॉल्वर रानी”, ‘‘बरेली की बर्फी”, ‘‘संजू”, ‘‘लाल कप्तान” जैसी फिल्मों के गाने लिखे हैं। शर्मा की अगली फिल्म शूजीत सरकार की ‘‘गुलाबो सिताबो” है, जिसके लिए उन्होंने दो गाने लिखे हैं।