दोनों दोस्त (Photo Credits-Twitter)
दोनों दोस्त (Photo Credits-Twitter)

    नई दिल्ली: देश में समय के साथ हमने कई ऐसे मामले देखें हैं जब विदेश में अच्छी जॉब छोड़कर लोगों ने भारत में स्टार्टअप को शुरू किया है। साथ ही उससे मोटी कमाई भी कर रहे हैं। ऐसे ही एक कहानी आईआईटी में पढ़े दो दोस्तों की है। जिनके नाम कपीश सराफ और अमृतांशु कुमार है। दोनों लंबे समय से एक दुसरे को जानते हैं। कपीश राजस्थान के सीकर के रहने वाले हैं। जबकि अमृतांशु बिहार के हैं। 

    ज्ञात हो कि इन दोनों ही दोस्तों ने इंजीनियरिंग और एमबीए की पढाई साथ में की। दोनों दोस्तों ने अलग-अलग कंपनियों में 10 साल तक नौकरी की। लेकिन फिर दोनों ने अपना कुछ शुरू करने का सोचा और पिछले साल नौकरी छोड़कर इन लोगों ने एक नया स्टार्टअप शुरू किया। जिसमें ये बच्चों को ऑनलाइन एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी मुहैया करवाते हैं। दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार इन दोनों द्वारा शुरू किये स्टार्टअप ने साल भर के अंदर 30 करोड़ का कारोबार किया है। इनके स्टार्टअप का नाम किडएक्स है। 

    गौर हो कि कपीश सराफ की शुरूआती पढ़ाई गुवाहाटी में हुई। फिर वे आईआईटी खड़कपुर चले गए। यहीं उनकी दोस्ती अमृतांश कुमार से हो गई। फिर दोनों ने साल 2010 में आईआईएम कोलकाता से एमबीए किया। फिर वे अलग-अलग कंपनियों में नौकरी करने लगे। कपीश ने अमेरिका और अफ्रीका में कुछ वर्ष काम किया। इसी दौरान उन्होंने यहां बच्चों की पढ़ाई और इससे जुड़े प्रोग्राम को करीब से समझा भी। 

    वहीं कपीश का कहना है कि हर बच्चे में कोई न कोई टैलेंट होता है लेकिन हमारे यहां बच्चा बड़ा हुआ नहीं कि उस पर पढ़ाई और करियर का दबाब डाला जाता है। 12वीं की पढ़ाई जैसे ही हुई बच्चे इंजीनियरिंग, मेडिकल या कोई अन्य प्रोफेशनल कोर्स करते हैं।  जिससे वे खुद के टैलेंट को समझ ही नहीं पाते हैं।  

    इस स्टार्टअप को शुरू करने से पहले दोनों ने पहले देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर रिसर्च किया और समझा कि बच्चे और उनके माता-पिता इसे लेकर उनकी क्या राय है। साथ ही इस प्रोग्राम में किन चीजों को शामिल किया जाएगा। साथ ही उनका मॉडल क्या होगा। 

    कपीश ने बताया कि अब तक 1 हजार से अधिक स्कूल हमारे साथ जुड़ चुके हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारा फोकस 6 से 12 साल तक के बच्चों पर होता है। जिसमें हमारी तरफ से  एक्स्ट्रा करिकुलम की हर वो एक्टिविटीज को शामिल किया जाता है जो बच्चों के लिए जरूरी है।