340 कमरों के घर में रहने वाला एक अनोखा फ़कीर – भारत रत्न डॉ. ऐपीजे अब्दुल कलाम

भारत जैसे देश में जहां ऐसी मुख्यमंत्री भी थीं जो जब भी कहीं जाती थीं तो उनके कारवां में कम से कम 10 सूटकेस साड़ियों से भरे और दो सूटकेस केवल उनकी चप्पलों से भरे होते थे। लेकिन इसी भारत देश में एक ऐसे राष्ट्रपति भी आए जिनके साथ बस उनके दो सूटकेस, एक वीणा और अनगिनत प्रेरणात्मक किस्सों और अनमोल विचारों का कारवां ही चलता था।

जी हाँ हम बात कर रहे हैं भारत के ‘मिसाइल मैन’ और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की।  यह उन दिनों की बात है जब कलाम साहब का चुनाव राष्ट्रपति पद के लिए हुआ था, परंपरा के अनुसार कलाम साहब को अगले पाँच साल तक नई दिल्ली स्थित, 340 कमरों वाले राष्ट्रपति भवन में रहना था। कलाम साहब के स्वागत के लिए भवन को अच्छी तरह सजाया-संवारा गया। तमाम तैयारियां यह सोचकर की गईं कि नये राष्ट्रपति का सारा सामान यहाँ व्यवस्थित तरीके से सजा दिया जायेगा। आखिर इतने बड़े देश के राष्ट्रपति आ हैं, दो-चार ट्रक भरकर सामान तो होगा ही।

लेकिन राष्ट्रपति भवन के 184 माली, 28 रसोइये, 37 ड्राइवर और 57 सफ़ाईकर्मचारी यह देख कर हैरान रह गए कि उनके नए राष्ट्रपति के सामान में उन सबको केवल एक सूटकेस और एक वीणा को संजा-संवार कर रखने का काम करना था।

अपने वैज्ञानिक से लेकर राष्ट्रपति तक के सफ़र के दौरान कलाम साहब ने कभी अपने नाम पर कोई संपत्त‍ि नहीं जोड़ी। उनका जो कुछ था वो सब दान कर दिया। जिंदगी भर कलाम साहब ने जहां भी नौकरी की, वहीं के गेस्ट-हाउस या फिर सरकारी आवासों में वे रह कर वह एक ऐसा आदर्श स्थापित कर गए हैं जिसकी प्रशंसा तो सभी करते हैं लेकिन उसका अनुसरण करना हर किसी के बस की बात नहीं है।

-रितु शर्मा