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    -सीमा कुमारी

    आज यानी 12 मई को ‘मोहिनी एकादशी’ (Mohini Ekadashi) का पावन व्रत है। यह व्रत हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, इस साल यह तिथि दो दिन 11 और 12 मई को है, परंतु  मोहिनी एकादशी व्रत 12 मई को ही रखा जायेगा। ‘मोहिनी एकादशी’ व्रत का पारण अगले दिन 13 मई को किया जाएगा।

    शास्त्रों के अनुसार, ‘मोहिनी एकादशी’ विशेष फलदायी एवं मनवांछित फल प्रदान करने वाला व्रत है। इस साल ‘मोहिनी एकादशी व्रत’ गुरुवार के दिन है। इस लिए मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी और पीपल वृक्ष की भी पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु अति प्रसन्न होते हैं और श्रद्धालु भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। मान्यता है कि, माता लक्ष्मी ऐसे भक्तों के यहां स्थायी रूप से वास करती हैं और भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करती हैं।

    कहा जाता है कि, रविवार के दिन पीपल की पूजा नहीं करनी चाहिए। अन्यथा व्रती को धन का अभाव झेलना पडेगा। धार्मिक मान्यताओँ के मुताबिक, रविवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे नहीं जाना चाहिए। इससे घर में दरिद्रता आती है।

    ऐसे करें पूजा ‘मोहिनी एकादशी’

    ‘मोहिनी एकादशी’ विशेष फलदायी होती है इसलिए भक्तों को इसकी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इस दिन भक्त को सदैव ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ-सफाई करें। उसके बाद स्नान कर साफ कपड़े पहन सच्चे मन से व्रत रखने का संकल्प लें। फिर घर के मंदिर को स्वच्छ रखें। घर के मंदिर में एक चौकी पर विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर पंचामृत तथा स्वच्छ जल से स्नान कराएं। 

    उसके बाद हल्दी, चंदन, अक्षत, अबीर, गुलाल, वस्त्र तथा मेंहदी भगवान को अर्पित करें। साथ ही धूपबत्ती तथा देशी घी का दीपक भी जलाएं। भगवान को भोग लगाते समय ध्यान रखें कि उन्हें मौसमी फल, मिठाई, मेवे, पंचमेवा तथा पंचामृत अर्पित करें। विष्णु भगवान को भोग लगाते समय सदैव ध्यान रखें कि कभी भी भोग सामग्री में तुलसी पत्र अवश्य रखें। अब भगवान की आरती उतार कर सूर्यदेव को जल चढ़ाएं। इसके बाद एकादशी व्रत कथा पढ़े और ईश्वर से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।