पाक के पख्तून प्रांत पर तहरीक-ए-तालिबान आतंकियों का कब्जा

    पाकिस्तान सरकार और वहां की सेना ने उस कट्टर आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सामने बेशर्मी से आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके हाथ पाकिस्तान के 132 स्कूली बच्चों के खून से रंगे हुए हैं. 2014 में पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमले में टीटीपी आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां चलाकर पाकिस्तानी सैनिकों के इन बच्चों की जान ले ली थी. टीटीपी के सामने पाक सरकार के सरेंडर करने से पेशावर स्कूल में मारे गए मासूम बच्चों के माता-पिता खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं और बेहद नाराज हैं तथा विरोध पर उतर आए हैं.

    अफगानिस्तान में हुकूमत करने वाले तालिबान की मध्यस्थता के बाद पाकिस्तानी सेना और टीटीपी के बीच स्थायी संघर्ष विराम हो गया, जिस पर शीघ्र ही हस्ताक्षर होंगे. इस समझौते के तहत पाकिस्तानी फौज बड़ी तादाद में टीटीपी आतंकियों को रिहा करेगी, साथ ही कबायली इलाके में तैनात हजारों पाकिस्तानी सैनिक हटाए जाएंगे.

    अफगानिस्तान सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मलकंद इलाके में बेहद कठोर शरिया कानून लागू किया जाएगा जिसमें आंख के बदले आंख निकाल लेने, अपराध के लिए कोड़े मारने, चोरी करने पर हाथ काट डालने और अवैध संबंध या बदचलनी जैसे गुनाह पर पत्थर मार-मारकर जान लेने का प्रावधान है.

    टीटीपी का गठन 2007 में हुआ था जो 14 वर्षों से उग्रवाद चला रहा है और कई पाकी फौजियों को मार चुका है. पाकिस्तान सरकार ने 2008 व 2009 में भी टीटीपी से समझौते किए थे लेकिन वह बाद में पलट गया. तब पाकिस्तान को अशांत स्वात घाटी में फौजी अभियान चलाना पड़ा था. मलकंद इलाके के 7 जिलों में से एक स्वात घाटी है.

    ऐसा कहा जा रहा है कि अफगानिस्तान की राजनीति को दिशा देने के लिए पाकिस्तानी फौज ने यह कदम उठाया है. पख्तून इलाका पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों में मौजूद है. यहां के कबीले बेहद हिंसक व कट्टर हैं जो सिर्फ बंदूक की भाषा जानते हैं और शुरू से ही अनियंत्रित व आजाद रहे हैं. पाकिस्तान इस समझौते से अपना सिरदर्द कम करना चाहता है. (एजेंसी)