म.प्र. भ्रष्टाचार का चमन फर्जी विवाहों के जरिए करोड़ों का गबन

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ‘मामा’ कहलाते हैं और मामा से बढ़कर भांजियों की चिंता आखिर कौन कर सकता है! इसीलिए उन्होंने ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ शुरू करवाई जो कि अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल है. इसमें गरीब परिवारों की लड़कियों के विवाह में सरकार आर्थिक सहयोग देती है. लड़की को गृहस्थी के लिए जरूरी चीजें मिलती हैं, वह खाली हाथ ससुराल नहीं जाती. एक तरह से यह मान लीजिए कि सरकार कन्यादान का फर्ज निभाती है. मुख्यमंत्री की इस अनूठी और सहृदयतापूर्ण योजना में भी एक संगठित रैकेट ने घोटाला कर डाला.’’

    हमने कहा, ‘‘किसी अच्छे काम में कितनी ही बाधाएं आती हैं. हमें बताइए कि इस कन्या विवाह योजना में किसने सुरंग लगाई और घोटाला किस तरह किया गया?’’

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, शातिर ठग और जालसाज किस्म के लोग मौका ढूंढते ही रहते हैं कि किस सरकारी योजना की रकम पर कैसे हाथ मारा जाए! जब पूरे देश में कोरोना की वजह से सख्त लॉकडाउन लागू था और शादी तथा अन्य समारोहों के लिए कोई अनुमति नहीं थी, तभी फर्जी विवाहों के जरिए करोड़ों रुपए की राशि का गबन किया गया. लॉकडाउन में हजारों जोड़ों की शादियां कागजों पर करवा देने का मामला सबसे पहले बीजेपी विधायक उमाकांत शर्मा ने विधानसभा में उठाया. विपक्ष ने भी शिवराज सरकार पर निशाना साधा. पता चला कि ऐसी 50,000 बोगस शादियां दिखाई गईं. मध्यप्रदेश सरकार गरीब बेटियों की शादी के लिए 51,000 रुपए की मदद देती है. अब यह रकम बढ़ाकर 55,000 रुपए कर दी गई है.’’

    हमने कहा, ‘‘जब कागजों पर सड़कें और पुल बना दिए जाते हैं, कुएं और तालाब खोदने का खर्च बताकर सरकारी रकम निकाल ली जाती है तो फर्जी शादी दिखाने में भी धूर्त लोग भला कैसे पीछे रहते! मुख्यमंत्री के निर्देश पर इकोनॉमिक आफेंसेज विंग (ईओडब्ल्यू) ने मामले की तहकीकात की और अब ईडी ने यह जांच अपने हाथ में ले ली है. हमें तो लगता है कि किसी शातिर गिरोह ने नेता और अफसरों की मिलीभगत से यह बड़ा घोटाला किया होगा.’’