शराबबंदी आंदोलन के जरिए उमा की शिवराज को चुनौती

    बीजेपी नेता उमा भारती यदि शराबबंदी को लेकर इतनी गंभीर हैं तो उन्होंने अपने इतने वर्ष के राजनीतिक जीवन में पहले कभी यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया? क्या आज उन्हें दिखाई दिया कि मध्यप्रदेश में पिछड़े वर्ग तथा अनुसूचित जाति-जनजाति की तादाद 92 प्रतिशत है और इनमें से अधिकतर लोग मद्यपान की वजह से बीमारी, गरीबी व गृहकलह के शिकार हैं. उमा भारती ने गुजरात और बिहार की शराबबंदी का हवाला दिया जहां कि बीजेपी और एनडीए की सरकार है.

    जाहिर है कि 15 जनवरी से प्रारंभ होने वाले अपने शराबबंदी आंदोलन के जरिए उमा भारती राज्य की शिवराजसिंह चौहान सरकार के लिए परेशानी पैदा करना चाहती हैं. शराबबंदी करने से राज्य सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होगा, इसलिए मुख्यमंत्री इसके लिए राजी नहीं होंगे. उमा भारती के इस आंदोलन को उनकी पार्टी बीजेपी का कितना समर्थन है? जब वे मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री और बाद में सांसद व केंद्रीय मंत्री रहीं, तब उन्होंने इस तरह का कोई मुद्दा नहीं उठाया.

    क्या अब वे अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए ऐसा कर रही हैं? उमा भारती की दलील है कि मध्यप्रदेश से ज्यादा आबादी का और पिछड़ा हुआ राज्य होने पर भी बिहार ने शराबबंदी से राजस्व की हानि का विकल्प निकाल लिया तो प्रदेश सरकार भी वैसा कर सकती है. क्या उमा भारती इस तथ्य से अवगत नहीं हैं कि जहां भी शराबबंदी लागू हुई, वहां या तो पड़ोस के राज्यों से शराब की तस्करी होने लगी या फिर मिलावटी जहरीली शराब से होने वाली त्रासदी के मामले सामने आए!