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    नयी दिल्ली/बलौदा बाजार.  जहाँ एक तरफ ‘कोरोना’ (Corona) से पूरी दुनिया के ही शिक्षा स्तर में व्यापक और प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वहीं बीते डेढ़ साल से स्कूलों में पढ़ाई ही नहीं हुई और बच्चे अपने घरों से ही ऑनलाइन मोबाईल से पढ़ाई कर रहे थे। इनमे से कुछ के पास तो मोबाईल नहीं होने के कारण या दुर्गम इलाकों में इंटरनेट की पहुंच भी नहीं थी। 

    लेकिन वहां भी देश के शिक्षको ने अपनी जिम्मेदारी निभाई हैं। इसके लिए शिक्षकों ने अपने हर बंधन और लिमिट को भी तोड़ा है। वैसे तो अपको छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के शिक्षक याद ही होंगे, इन्होंने लॉकडाउन में अपने दो पहिए वाहन को ही रनिंग मोड स्कूल बनाया था। लेकिन अब हम ऐसी ही अनोखी महिला शिक्षिका से आपको मिलाने जा रहे है जो अब बच्चों को अलग ही लेकिन बहुत ही निराले और खूबसूरत अंदाज में पढ़ा रही है।

    बच्चों के हाथों पर लगी अक्षरों की मेंहदी

    जी हाँ बलौदा बाजार (Baloda Bazar) जिले में अब महिला शिक्षिका ने बच्चों के हाथो मे वर्णमाला की ही सुन्दर सी मेंहदी लगाई है। इन छात्रों के हाथों में अक्षरों और मात्राओं को मेहंदी लगाकर कर बच्चों को इतना बेहतरीन अक्षर ज्ञान सिखाया जा रहा है की पूछिए मत। घटना पलारी विकासखंड में स्थित छड़िया प्राथमिक सरकारी स्कूल की है। यहाँ कि एक कर्मठ  शिक्षिका आराधना वर्मा स्कूल के छोटे बच्चों को मेंहदी लगाकर पढ़ा रही है। बता दें की शिक्षिका आराधना वर्मा और उनके पति घनश्याम वर्मा दोनों ही पेशे से शिक्षक हैं और बच्चों की पढ़ाई के बारे में निरंतर बातचीत करके सीखने के लिए नए-नए प्रभावी तरीके खोजते ही रहते हैं।

    थी कई जिम्मेदारी लेकिन फिर भी पढ़ाते रही

    हालाँकि इन्हें कई बार बहुत से लग-अलग कामों के लिए जिम्मेदारी देकर बड़े काम के लिए आमंत्रित किया गया। लेकिन इन सब जिम्मेदारियों को छोड़कर इन्होंने अपनी सबसे प्रमुख जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाने पर ही अपना लक्ष्य रखा। इन दोनों पति-पत्नी  ने अपना अधिकतम समय कक्षा के भीतर बच्चों के साथ सीखने और सिखाने के लिए विभिन्न गतिविधियों में ही दिया है।

    देखा जाए तो जिम्मेदारी हर कोई उठा लेता है, लेकिन इसे अपनी कर्मठता से एक मिशन बना देना और फिर उसे पूरा करने के लिए अपनी सम्पूर्ण शक्ति लगा देना, सचमुच कोई शिक्षिका आराधना वर्मा और उनके पति से सीखे। इन दोनों  के जज्बे को हमारा सलाम।