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    • कार्रवाई तो हो रही है फिर भी गुटखा उपलब्ध है 

    अकोला. जिले में कहीं भी गुटखा धड़ल्ले से बिक रहा है और देखा जा रहा है कि जिले में गुटखा प्रतिबंध केवल नाम के लिए है. संबंधित विभागों की ओर से कार्रवाई तो की जा रही है लेकिन वह पर्याप्त नहीं है. खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारी और पुलिस विभाग का इस ओर पूरी तरह ध्यान नहीं जा रहा है. जिस तरह महाविकास अघाड़ी सरकार के कार्यकाल से पूरे प्रदेश में केवल नाम के लिए जारी किया गया गुटखे पर प्रतिबंध जिले में आज भी जारी है.

    पूर्व में तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक जी. श्रीधर के कार्यकाल में अमरावती मंडल के तत्कालीन विशेष पुलिस महानिरीक्षक चंद्रकिशोर मीणा ने कई छापेमारी की और ट्रक दर ट्रक जब्त किया था. इनमें से कई माफियाओं के खिलाफ जिला अदालत में मामले भी चल रहे हैं. इस मामले में कई पुलिस कर्मियों को भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था. इस बीच दोनों पुलिस अधिकारियों के तबादले हुए हैं. लेकिन जिले में गुटखे की बिक्री पहले की तरह ही जारी है. और कार्रवाई नाममात्र दिखाई दे रही है.

    गुटखा माफियाओं का नेटवर्क शहर में आज भी उसी तरह काम कर रहा है, जैसे पहले था. आस पास के राज्यों से गुटखा तस्करी अभी भी जोरों पर है. शहर के बाहर कुछ इलाकों में करोड़ों का गुटखे के स्टॉक अनलोड किया जाता है और मांग के अनुसार शहर के दूकानदारों, ठेले के संचालकों, चिलर वितरकों को आवश्यक मात्रा में उपलब्ध किया जाता है.

    वर्तमान में गुटखा अपनी असली कीमत से तीन से चार गुना महंगा बिक रहा है. इसका करोड़ों का दैनिक कारोबार है और इसके कई लाभार्थी हैं. गुटखा कहां से आता है, कौन लाता है, कहां बेचा जाता है, इसकी पूरी जानकारी संबंधित विभागों को होती है. लेकिन ज्यादा दबाव होने पर ही नाम मात्र की कार्रवाई की जाती है और खबर के लिए सूचना भेजी जाती है. यह खेल अधिकारी, कर्मचारी, वितरक कई वर्षों से करते आ रहे हैं.

    उपयोग कर्ताओं में युवाओं का प्रमाण अधिक

    शहर में कुछ छोटी छोटी किराने की दूकानों और चाय की दूकानों के साथ ठेलों पर गुटखा भी चोरी छिपे बेचा जाता है. इसमें आपको विमल, पान बहार, पान मसाला, वाह, आरएमडी, आरजे आदि जितने गुटखा पाउच है आसानी से मिलते हैं. इन गुटखा खाने वालों में युवाओं की संख्या अधिक है और दिन प्रतिदिन संख्या बढ़ती ही जा रही है क्योंकि प्रतिबंध के बाद भी खुलेआम गुटखा मिल रहा है.